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मंगलवार, 12 जनवरी 2021

CLASS 10 HINDI :KRITIKA : CHAPTER 1 "माता का आँचल" शिवपूजन सहाय

   CLASS 10 HINDI: KRITIKA : CHAPTER 1 

 "माता का आँचल"   शिवपूजन सहाय  

CLASS 10 HINDI: KRITIKA : CHAPTER 1 

 "माता का आँचल"   शिवपूजन सहाय  




"माता का आँचल" शिवपूजन सहाय द्वारा लिखित ग्रामिण परिवेश को परिलक्षित करती बचपन की यादो को संग्रह कर वर्णित किया गया है। इस संकलन में आपको "माता का आँचल" पाठ से सम्बंधित PDF( पूरा चैप्टर), "माता का आँचल का सारांश " solution सब आपको इसी पोस्ट में मिल जाएगा। 




Mata ka aanhal PDF "माता का आँचल"
                  "सारांश"

"माता का आँचल"  शिवपूजन सहाय द्वारा ग्रामीण परिदृश्य को दर्शाती बड़ी ही खूबसूरत, बात्सल्य और ममता से भरी कहानी है जहाँ गाँव में अठखेलियाँ करते बच्चे,तो पिता के आशीष के साथ माँ के ममता को भी बड़ी ही शालीनता के साथ दर्शाया गया है।

                          लेखक ने इसमें छोटी-छोटी तुकबंदीयो को भी जोड़ा है जो कहानी को और भी रोचक बनाती है। उन्होंने इसमें एक सभ्य समाज के दिनचर्या, जैसे सुबह जल्दी उठने से लेकर, उनके पूजा-पाठ, रामनामा बही तक की चर्चा की है। कैसे गाँव के बच्चे अपने जुगाड़ू सामानों के जरिये ही नई खेल का निर्माण कर लेते हैं और संतुस्ट भी रहते हैं तो उनके पिता का स्नेह भी उनके उत्साह को बढ़ाता है। पौराणिक ग्रंथ जैसे रामायण तक की चर्चा करके लेखक ने हमे हमारी संस्कृति से भी जोड़ा है, जो कि बच्चो में अच्छे संस्कार की नींव होती है, तो पशु प्रेम को भी इस कहानी से अछूता नहीं रखा गया। थोड़ी बहुत शैतानियों को भी जोड़ा गया है, जो बच्चो का अधिकार होता है। उसके बिना बचपना कैसा? लेखक जो इस कहानी में तारकेस्वर नाथ उर्फ भोला नाथ के नाम से जाने जाते हैं और अपने पिता जी को" बाबू जी " एवं अपनी माँ को "मईया "कहकर बुलाते हैं। वो सारा समय तो अपने पिता के साथ ही व्यतीत करते हैं और लेखक के पिता भी हर जगह अपने बेटे के  साये या साथी की तरह, उनका ख्याल रखना हो या उनके खेल में मनोरंजन को बढ़ावा देना हो। वो हर जगह अपने पुत्र का साथ देते हैं।लेकिन जब असल ममता की जरूरत पड़ती है, यानि की जब वो भय से व्याकुल हो जाते हैं, तब तो उन्हें केवल अपनी माँ का आँचल ही याद आता है।कवि ने इस पाठ का नाम "माता का आँचल" बड़े ही सोच समझ कर रखा है जो इस पाठ के लिए एकदम उपयुक्त है और हो भी क्यों न माँ के आँचल यानी उनके वात्सल्य की तुलना तो किसी से भी नही की जा सकती।

                "माता का आँचल" 

प्रश्न अभ्यास 

 प्रश्न १*  प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता सकता है कि , बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था , फिर भी विपदा के समय अपने पिता के पास न जाकर माँ की सरण  लेता है,आपकी समझ  क्या कारण हो सकता है ?   

उत्तर :-- प्रस्तुत पाठ "माता का आँचल" के आधार पर भोला नाथ अपने पिता के साथ ज्यादा समय व्यतीत करते हैं ,क्योंकि वहां उनको स्नेह के साथ - साथ घूमना - फिरना से लेकर खेल आदि में भी उनका साथ मिलता है तो एक तरफ  गुरु जी के डांट से भी उनके पिता उनको बचाते हैं। 

लेकिन बच्चे सबसे ज्यादा  प्रेम, वात्सल्य और ममता के भूखे होते हैं , जो उन्हें माता के आँचल में ही प्राप्त होता है। इस कहानी में लेखक सांप से  अत्यंत भयभीत हो गए हैं , यहाँ उनको माँ के नरम एहसास की जरुरत है जो उनको माँ के ममता के छाँव में ही मिलने वाला है।  इसलिए वे वही जाकर राहत लेते हैं। 

प्रश्न २* आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाते हैं ?

उत्तर :-- भोला नाथ चुलबुले स्वाभाव के बच्चे हैं  जिनको अपने दोस्तों के साथ खेलना बहुत पसंद है,इसलिए  उनको देखकर वो  सिसकना भूल जाते हैं।  बच्चो का स्वाभाव भी होता है कि अपने छोटे - मोटे दुःख -दर्द को  भूल जाए। और इस कहानी में तो लेखक के हुरदंग मंडली के चर्चे जोरो से  किये गए हैं , इसलिए वे जब  बच्चो को देखते हैं तो उनको सिर्फ खेल याद आता है और सिसकना भूल जाते हैं।  

प्रश्न ३* आपने देखा  होगा कि भोलानाथ  और उसके साथी जब - तब खेलते - खाते समय किसी न किसी प्रकार की तुकबंदी करते रहते हैं आपको यदि अपने बचपन के  खेलो आदि से जुड़ी तुकबंदी याद है तो लिखिए। 

उत्तर :-- मेरे बचपन से जुड़ी तुकबंदी जो मुझे याद है, वो ये है--   झोटा रे झोटा।                                                             सुई में धागा छोटा।।

प्रश्न 4  *    भोलानाथ और उनके साथियो के खेल और उनके खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है ?  

उत्तर :--  भोलानाथ और उनके साथियो के खेलने की सामग्री से हमारे खेलने की सामग्री बहुत अलग है। वे अपने आँगन में , खेतो में, दरवाजो पर पड़ी किसी भी चीज को अपनी खेल सामग्री  बना  लेते हैं. चाहे वो टूटे बर्तन , पत्थर,या गीली मिटटी ही क्यों न हो।घर का दरवाजा ,आँगन या खेत - खलिहान , किसी भी जगह को खेल मंच बना लेते हैं.  

लेकिन हमारे लिए खेल जगह सिमित हो गए हैं , हमारे खेलो में शारीरिक व्यायाम से ज्यादा दिमागी व्यायाम होते हैं ,हमारे खिलौने  महंगे और ज्यादातर बैठकर खेलने वाले होते हैं। हम अपने दोस्तों के साथ कम खेलते हैं। भोलानाथ का खेल देखकर हमें भी अपने बचपन में लौटकर और हुरदंग मचाने का मन करता है। 

प्रश्न 5 *पाठ में आये ऐसे प्रसंगो का वर्णन कीजिये जो आपके दिल को छु गए हो।  

उत्तर :-- ऐसे तो पाठ में अनेक प्रसंग है जो दिल को छू लेने वाले हैं लेकिन मेरे दिल को जो छुआ वो ये है कि लेखक के पिता हर वक्त उनके साथ होते हैं, चाहे वो खेल की जगह हो या सुबह की नहलाने - धुलाने,प्रार्थना से लेकर खाने - पीने तक का खयाल रखते हैं। जहां उनको शारीरिक स्फूर्ति से लेकर मानसिक सहानुभूति भी मिलती है।इतना ही नही वो उनको शिक्षक के फटकार से भी बचाते हैं।

प्रश्न 6 * इस उपन्यास अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं।  

उत्तर:-- आज की ग्रामीण संस्कृति में बहुत परिवर्तन आ गया है जो कुछ अच्छी भी है और कुछ बुरी भी।                                         जैसे कि नए - नए कृषि उपकरणों का अविष्कार, किशानो में जागरूकता अभियान, विद्यालय आदि का निर्माण।।                       तो दुसरी तरफ गाँव मे रहने वाले लोगो का शहर के तरफ आकर्षण, सभी युवा पीढ़ी का पढ़ने के लिए शहर जाना फिर वही नौकरी के सिलसिले में बस जाना। ये सभी बातें गाँव के प्रति अरुचि को प्रदर्शित करती है जो सही नही है।माता - पिता भी अपने बच्चो को स्वच्छंद नही छोड़ते, दुसरे बच्चो के साथ। ये सभी बातें गाँव के पतन का कारण बन सकती है।

प्रश्न 8 * यहाँ माता - पिता का बच्चो के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखिए। 

उत्तर :-- "माता का आँचल" पाठ में माता - पिता का अपने बच्चो के प्रति एकदम निश्छल प्रेम को व्यक्त किया गया है,सुबह उठकर नहला- धुलाकर पूजा पाठ चन्दन - रोली  से रामनामा बही तक के बारे में बताया गया है जो बच्चे में एक स्वस्थ और संस्कारी दिनचर्या को इंगित करता है तो दूसरी तरफ - माता पिता का खाने से लेकर खेलने तक की पूरी छूट दी गई है जिससे बच्चे का शारीरिक व्यायाम के साथ साथ स्वस्थ मानसिकता का विकाश होगा। पिता का बच्चे के हर खेल में रूचि लेने का अर्थ है कि वो अपने बच्चे पर पूरा ध्यान रखते हैं तो चोट लगने पर माता के आँचल में बच्चे का छिप जाना माता और बच्चे के प्रति एक-दूसरे के पूर्ण वात्सल्य को प्रदर्शित करता है और माँ हर जरुरी  काम छोड़कर अपने बच्चे  को  आँचल में समेट लेना माँ के नर्म हृदय को इंगित करता है। 

प्रश्न 9 *  माता का आँचल शीर्षक की उपयुक्ता बताते हुए  शीर्षक बताइये। 

उत्तर :-- "माता का आँचल" शीर्षक माँ और बच्चे के बिच पूर्ण  बात्सल्य को बताता है। अगर कहानी का शीर्षक बदला  जाए तो मेरे हिसाब से इसका नाम बचपन रखा जा सकता है, क्योंकि इस पाठ में कवि ने पूरी कोशिश की बचपन की अठखेलियों को दर्शाने की।


मैंने "माता के आंचल" पाठ से संबंधित हर विषयो पर बच्चों के संकाओ और उनके कौतूहल तथा प्रश्न अभ्यास को भी बड़े ही सरल भाषा मे वर्णित कर , उनकी पढ़ने की रुची को बढ़ाने की कोशिश की है । उम्मीद है आप सबको पसंद आएगी।तो प्लीज कमेंट और शेयर जरूर करे।

                                           धन्यवाद🙏🙏


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