सच्चा मित्र (निबंध लेखन )
सच्चा मित्र नाम आते ही मन में एक खूबसूरत ,भावनात्मक सम्बन्ध का विचार आता है। वो मित्र जो हर वक्त आपके साथ खड़े हैं। बचपने की बदमाशी हो या बड़े होने पर खाश निर्णय,सब में उनका सहयोग होता है।
स्कूल में बांटकर खाए हुए लंच बॉक्स के नास्ते हो या जरुरी पड़ने पर पैसो का उधार ,वो हर वक्त तैयार रहते हैं। जब आपको जरुरत होती है तो वो समय नहीं देखते कि दिन है या रात बस सहयोग के लिए तत्पर रहते हैं। जब भी आप उनसे अपने मन की बात करते हैं, चाहे वो दुःख हो या परेशानी वो आपकी बातो को गंभीरता से सुनते हैं और कुछ अच्छा सुझाव देने की कोशिश करते हैं पर किसी भी हाल में वो आपका मजाक बनाने की कोशिश नहीं करते। जो बात आप अपने माता - पिता से नहीं कर पाते वो बात भी आप अपने सच्चे मित्र से कर सकते हैं। बचपन में आम के पेड़ से तोड़ी गई अम्बिया से लेकर किशोर अवस्था में लिखी गई प्रेम पत्र या कॉलेज का चुनाव, या फिर हाथ में आई नौकरी की जॉइनिंग लेटर हर एक बात का साँझा अपने प्रिय और सच्चे मित्र के साथ करते हैं। जब भी आप किसी मुसीबत में पड़ते हैं तो मन में विस्वाश होता है कि कोई है जो आपके लिए खड़ा है और आपके एक बुलावे पर वो आपके लिए कुछ भी कर सकता है।
सच्चा मित्र सिर्फ साथ देने के लिए भी नहीं होता। वो आपकी गलतियों को भी सुधारने की कोशिश करता है। गलत रास्ते पर चलने को मना करता है और गलत संगति से भी बचाता है। जिंदगी में जब हारा हुआ महशूश करते हैं तब वो आपकी शक्ति बनने की भी कोशिश करता है और अकेला होने पर हमदर्द बनने की कोशिश करता है। सच्चा मित्र वो होता है ,जिसकी याद अकेले में आने पर आपके होठो पर मुस्कान आ जाती है।
हर किसी के जिंदगी में एक सच्चा और अच्छा मित्र जरूर होना चाहिए।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें