क्लास 10 रस, solved questions, कविता PDF
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रस
रस स्थाई भाव
श्रृंगार रति (स्त्री पुरुष का प्रेम)
स्त्री -पुरुष के पारस्परिक सम्बन्ध (मिलन या विरह )के वर्णन से मन में उत्पन्न होने वाले आनंद को श्रृंगार रस कहते हैं।
आचार्य भोज ने श्रृंगार रस को रस राज या रासो का राजा कहा है।
श्रृंगार रस का स्थाई भाव रति होता है।
इसके दो भेद होते हैं।
* संयोग रस
*वियोग रस
संयोग रस - जब नायक - नाइका के परस्पर मिलन ,स्पर्श,आलिंगन वार्तालाप का वर्णन होता है तब संयोग श्रृंगार रास होता है।
उदाहरण - * वतरस लालच लाल की ,मुरली धरी लूराय।
सौंह करै भौंहनि हँसै ,दैन कहै नारी जाय।।
* दुलीहीन गावहु मंगलचार।
आये राजा राम भरतार।।
* वियोग रस - जहां नायक नायिका के बिच परस्पर प्रेम हो लेकिन मिलान न हो पाए अर्थात नायक - नाइका के वियोग का वर्णन हो वहां वियोग रस होता है। इसका स्थाई भाव भी रति है।
उदाहरण - *कान्हा भये बस वांसुरी के,
अब कौन सखी हमको चाहि है।
*निसदिन बरसत नैन हमारे
सदा रहती पावस ऋतु हम पै जब ते स्याम सिधारे
हास्य हास (वाणी या अंगो में उत्पन्न उल्लास,हँसी )
वाणी,वेशभूषा ,विकृत आकार इत्यादि के कारण मन मे हास्य का भाव उत्पन्न होता है उसे हास्य रस कहते हैं। इसका स्थाई भाव हास है।
उदाहरण - मुन्ना ने ममी के सर पर देखि दो दो चोटी।
भात उठा भाग गया सर पर सापिन लोटी।।
* हाथी जैसी देह है गैण्डे जैसी खाल।
तरबूजे सी खोपड़ी खरबूजे से गाल।।*
करुण शोक(प्रिय के वियोग या हानि के कारण उत्पन्न व्याकुलता)
ह्रदय में स्थित शोक नामक स्थाई भाव का उद्गम होना , करुण रस कहलाता है। इस रस की उत्पत्ति वन्धु के विनाश या किसी प्रिय की मृत्यु या किसी अनिष्ट के कारण आये स्थाई भाव को करुण रस कहते है।
उदाहरण :- - * हाँ रघुनन्दन प्रेम परिते।
तुम बिन जिअत बहुत दिन बीते।।
* इस करुणा कलित ह्रदय में क्यों विकल रागिनी वजती
इन हाहाकार स्वरों में वेदना असीम गरजती।।
वीर रस उत्साह (दया,दान,वीरता आदि प्रकट करने में प्रसन्नता का भाव )
शत्रु के उत्कर्ष को मिटाने ,दोनों की दुर्दशा देख उनका उद्धार करने या धर्म का उद्धार करने आदि जो उत्साह कर्म क्षेत्र में प्रवृत करता है , वीर रस कहलाता है। इसका स्थाई भाव उत्साह है।
उदाहरण :--- *चंद्र चेतक पर तलवार उठा ,करता था भूतल पानी को।
राणा प्रताप सिंह काट - काट करता था सफल जवानी को।.
* रक्त है ?या है नसों में पानी
जांच कर तू सीस दे देकर जवानी।।
रौद्र रस क्रोध(कार्य बिगारने वाले को दंड देने की मनोबृति)
क्रोध नामक स्थाई भाव जब अनुचित कार्यो ,शत्रु अथवा विरोधी के अनुचित चेस्टाओ के कारण उत्पन्न होता है ,तब वहां रौद्र रस होता है। इसका स्थाई भाव क्रोध है।
उदाहरण :--- * श्री कृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्रोध से जलने लगा।
सब शोक अपना भूलकर करतल युगल मलने लगा।।
*उस काल मारे क्रोध के तनु कांपने उनका लगा।
मानो हवा के वेग से सोता हुआ सागर जगा।।
भयानक रस भय(विनाश कर सकने में समर्थ या वास्तु को देखकर उत्पन्न व्याकुलता)
भय नामक स्थाई भाव ,विभाव ,अनुभाव और संचारी भाव के संयोग से भयानक रस का रूप ग्रहण करता है। किसी अनहोनी अथवा भयानक वस्तु ,व्यक्ति के देखने, उससे सम्बंधित वर्णन सुनने। स्मरण करने आदि से व्याकुलता उत्पन्न होती है ,उसे भयानक रस कहते है। इसका स्थाई भाव भय है।
उदाहरण:--- *उधर गरजती सिन्धु लहरियां ,कुटिल काल के जालो - सी।
चली आ रही फेन उगलती ,फन फैलाए व्यालो सी।.
*उस सुनसान डगर पर था सन्नाटा चारो ओर
गहन अँधेरी रात घीरी थी , अभी दूर थी भोर
सहसा सुनी दहाड़ ,पथिक ने सिंह गर्जन भारी
होश उड़े ,सर गया घूम हुई शिथिल इन्द्रियां सारी।।
वीभत्स रस जुगुप्सा(घिनौने पदार्थ को देखकर ग्लानि या घिन)
जहां घिनौने पदार्थ को देखकर ग्लानि या घिन उत्पन्न हो ,वहां वीभत्स रस होता है। जैसे युद्ध के पश्चात चारो ओर शव बिखरे हो , अंग आदि कटकर गिरे हो ,गिद्ध और कौवे शव को नोच रहे हो। इसका स्थाई भाव जुगुप्सा है।
उदाहरण :------ *सीर पर बैठ्यो काग आँख दुओ खाट निकरत
खिंचत झीभीहि स्यार अतिहि आनंद उर धरत
गिद्ध जाँघि को खोदी - खोदी के मांस उपरात
स्वान आगुरिन काट काटी की खाद विदरत।।
*इस ओर देखो , रक्त की यह कीच कैसे मची रही
है पर रही कांडित हुए बहु रुण्ड मुंडो से मही
कर - पद असंख्य कटे पड़े शस्त्रादि फैले हैं तथा
रुनिस्थिति ही मृत्यु का एकत्र प्रकृति हो सदा।।
अद्भुत रस विस्मय (अनोखी वस्तु को देखकर या सुनकर आस्चर्य का भाव)
जहां पर चकित कर देने वाला प्रसंग के चीत्रण उत्पन्न होता है ,वहाँ अद्भुत रस होता है। इसका स्थाई भाव आश्चर्य है।
उदाहरण :----- * देखि यशोदा शिशु के मुख में सकल विश्व की माया।
छणभर को वह वाणी अचेतन हिट न कोमल काया।।
*भय प्रगट कृपाला दिन दयाला कौशल्या हितकारी।
हर्षित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप विचारी।।
शांत रस शांत (निर्वेदसंसार के प्रति उदासीनता का भाव )
जहां पर संसार के प्रति उदासीनता के भाव का वर्णन किया गया हो वह शांत रास होता है। इसका स्थाई भाव निर्वेद होता है।
उदाहरण : --- *शेष,महेश , गणेश , दिनेश ,षुरेशहु जाहि निरंतर गावे।
*बैठ मारुती देखते राम चरण विंद
युग अस्ति - नास्ति के एक रूप गुण अनिनदय।।
वात्सल्य स्नेह(सन्तान या अपनों से छोटे के प्रति स्नेह)
अपने छोटे के प्रति स्नेह भाव का चित्रण होने पर वात्सल्य रस होता है। इसका स्थाई भाव स्नेह है।
उदाहरण: - * उठो लाल अब आँखे खोलो
पानी लाइ हूँ मुंह खोलो
*मैया मोरी चंद्र खिलौना लौ हों
ज्योंहों कोटि गैस पर अभी तेरे गोद न अइयो
भक्ति रस देव विषय करति (ईश्वर के प्रति प्रेम)
जहां इस्वर के प्रति प्रेम की भावना का वर्णन किया गया हो वहाँ भक्ति रस होता है। इसका स्थाई भाव देव विषयक रति होता है।
उदाहरण :-- *राम सौ बड़ो है कौन , मोसो कौन छोटो ?
राम सौं खरो है कौन मोसो कौन खोटो?
* जब जब होइ धरम की हानि वदहीं असुर अधम अभिमानी
तब तब प्रभु धरी मनुज शरीस
हरहिं किरपा विधि सज्जन पीड़ा।।
रस के अंग :--
हिंदी व्याकरण में रस के चार अवयव या अंग होते हैं।
1 * विभाव
2 * अनुभाव
3 * संचारी भाव
4 * स्थाईभाव
रस का विभाव :--
जो व्यक्ति अन्य व्यक्ति के हृदयो के भाव को जगाते है उन्हें विभाव कहते है। इनके आश्रय से रस प्रकट होता है। ये कारण निमित अथवा हेतु कहलाते है। अथवा भावो को प्रकट करने वाले को विभव रस कहते है।
स्थाई भाव के प्रकट होने का मुख्य कारण आलम्बन विभाव होता है। इसी की वजह से रस की स्थिति होती है। प्रकट हुए स्थाई भाव को और ज्यादा प्रबुद्ध ,उद्दीप्त और उत्तेजित करने वाले कारणों को उद्दीपन विभाव कहते है।
रस का विभाव दो तरह का होता है :--
1 * आलम्बन विभाव
2 * उद्दीपन विभाव
1 * आलम्बन विभाव :-- जिसका आलम्बन या सहारा पाकर स्थाई भाव जागते हो आलम्बन विभाव कहलाता है। जैसे नायक- नायिका
आलम्बन विभाव के दो पक्ष होते है।
अ * आश्रयालम्बन
ब * विषयालम्बन
जिसके मन में भाव जगे हो उसे आश्रयालम्बन और जिसके कारण भाव जगे हो उसे विषयालम्बन कहते है। उदाहरण :-- यदि कृष्ण के मन में राधा के प्रति, रति के जागते हैं तो कृष्ण आश्रय हुए और राधा विषय।
उद्दीपन विभाव :-- जिन वस्तुओ और परिस्थितयों को देखकर मन में स्थाई भाव उद्दीप्त होने लगते है , उद्दीपन विभाव कहलाता है।
उदाहरण :-- पिज़्ज़ा को देखकर बच्चो को उसे पाने की शारीरिक और मानसिक चेष्टा।
रस का अनुभाव :-- मनोभाव को व्यक्त करने के लिए वाणी या अंगो के अभिनय द्वारा अर्थ प्रकट होता है उसे रस का अनुभाव कहते है। अनुभावों की कोई संख्या अभी निश्चित नहीं हुई है। जो आठ अनुभाव सहज और सात्विक विकारो के रूप में आते है उन्हें सात्विक भाव कहते है। ये अनायास सहज रूप से प्रकट होती है ,इनकी संख्या आठ होती है।
1 * स्तंभ
2 * स्वेद
3 * रोमांच
4 * स्वर - भंग
5 * कम्प
6 * विवर्णता
7 * अश्रु
8 * प्रलय
रस का संचारी भाव :-- जो स्थानीय भाव के साथ संचरण करते है संचारी भाव कहलाते है। इससे भाव की स्थिति स्पष्ट होती है। एक संचारी किसी स्थाई भाव के साथ नहीं रहता इसलिए व्यभिचारी भाव भी कहलाते हैं। इनकी संख्या ३३ मानी जाती है।
हर्ष श्रम मति
चिंता मद स्वप्न
गर्व मरण अपस्मार
जड़ता त्रास निर्वेद
बिबोध असूया आलस्य
स्मृति उग्रता उन्माद
व्याधि धृति लज़्ज़ा
विषाद निद्रा अमर्ष
शंका अवहित्था चपलता
उत्सुकता ग्लानि दैन्य
मोह दीनता सन्त्राश
औत्सुक्य चित्रा वितर्क
4. स्थाई भाव :-- स्थाई भाव का मतलव है प्रधान भाव। प्रधान भाव वही हो सकता है जो रस की अवस्था तक पहुँचता है। काव्य या नाटक में एक स्थाई भाव सुरु से अंत तक होता है। स्थाई भावो की संख्या ९ मानी गई है। स्थाई भाव ही रस का आधार है। एक रस के मूल में एक स्थाई भाव रहता है। अतः रसो की संख्या भी ९ हैजिन्हे नवरस कहा जाता है। मूलतः नवरस ही माने जाते है। बाद के आचार्यो ने २ और भावो, बात्सल्य और भगवत विषयक रति को स्थाई भावो की मान्यता दी है। इसलिए स्थाई भाव की संख्या ११ तक पहुँच जाती है।अतः रसो की संख्या ११ है।
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कुछ वस्तुनिष्ठ प्रश्न:--
1 * किस रस को रस राज भी कहा जाता है ?
(अ ) शांत रस
(ब) करुण रस
(स) हास्य रस
(द) श्रृंगार रस (उत्तर)
2 * " वीभत्स रस "का स्थाई भाव क्या है?
(अ) उत्साह
(ब) शोक
(स) जुगुप्सा (उत्तर)
(द) हास
3 * भय की अधिकता में किस रस की निष्पत्ति होती है ?
(अ ) वीर रस
(ब ) करुन रस
(स) भयानक रस (उत्तर)
(द )रौद्र रस
4 * निर्वेद किस रस का स्थाई भाव है ?
(अ ) शांत रस (उत्तर)
(ब ) करुण रस
(स) हास्य रस
(द ) श्रृंगार रास
5 * 'तनकर भाला यूँ बोल उठा
राणा मुझको विश्राम न दे।
मुझको वैरी से ह्रदय क्षोभ
तू तनिक मुझे आराम न दे। '
प्रश्न * उपर्युक्त काव्य पंक्तियों में निहित रस है ?
(अ ) वीर रस (उत्तर)
(ब) शांत रस
(स) करुण रस
(द ) रौद्र रस
प्रश्न :-- रस की उत्पत्ति को व्यक्त करने वाली आश्रय की चेष्टाएँ कहलाती है -
(क)विभाव
(ख ) संचारी भाव
(ग) अनुभाव (उत्तर)
(घ) स्थाई भाव
प्रश्न :-- 'वीर रस' का स्थाई भाव है -
(क) हास
(ख ) रति
(ग) शोक
(घ) उत्साह (उत्तर)
प्रश्न :-- 'राम-नाम रस पीजै मनुआं राम-नाम रस पीजै। 'उक्त पंक्ति में विद्य्मान रस है -
(क) शांत रस
(ख ) करुण रस
(ग) भक्ति रस (उत्तर)
(घ) श्रृंगार रस
प्रश्न :-- श्रृंगार रस का स्थाई भाव है -
(क) उत्साह
(ख ) शोक
(ग) रति (उत्तर)
(घ) भय
प्रश्न :-- भयानक रस का स्थाई भाव है -
(क) उत्साह
(ख ) शोक
(ग ) हास
(घ) भय
प्रश्न * निम्नलिखित पंक्तियों में कौन सा रस है ?
आ रही हिमालय से पुकार
है उद्दधि गरजता बार - बार
प्राची (पूर्व दिशा ) पश्चिम भू नभ अपार
सब पूछ रहे हैं दिग-दिगन्त
विरो का कैसा हो वसंत।
उत्तर :-- यह वीर रस का उदाहरण है।
प्रश्न * 'रौद्र रस' का स्थाई भाव लिखिए।
उत्तर :-- रौद्र रस का स्थाई भाव 'क्रोध ' है।
प्रश्न * 'आश्चर्य' किस रस का स्थाई भाव है ?
उत्तर :-- 'अद्भुत रस ' का स्थाई भाव है।
प्रश्न * 'हास्य रस' का उदाहरण लिखिए।
उत्तर :-- मरकट बदन भयंकर देही। देखत ह्रदय क्रोध भा तेहि।।
जेहि दिसि बैठे नारद फूली। सो दिसि तेहि न बिलोकि भूली।।
इस पद में हास्य रस है।
स्थाई भाव --- हास
आश्रय - शिव के गण
आलम्बन - वानर की आकृति नारद
अनुभाव - नारद को देखना , मुस्कुराना , ऊपर की और उचकना आदि
व्यभिचारी भाव - हर्ष


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