Hi, here we go for all solutions, whatever faced by children.I am there for them always with my pen for whatever comes to my mind, class-3 to10 all problem's solutions, I want to share with my well-wishers and for dear students. I m writing my blog "NCERT books and Solution" for class 3 to 10, mentioned with ncert book and grammar also.

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बुधवार, 7 जुलाई 2021

पद्द, "गाँव के लड़के" सुमित्रानन्दन पंत , ,अपठित पद्यांश solution हल


पद्द, "गाँव के लड़के" सुमित्रानन्दन पंत , ,अपठित पद्यांश solution हल  


मिट्टी  से भी मटमैले तन,

अधफटे, कुचेले जीर्न वसन ,

ज्यों मिट्टी के हो बने हुए 

ये गँवई लड़के -भू के धन !


 कोई खंडित, कोई कुंठित,

कृश(कमज़ोर ) बाहु, पसलियाँ रेखांकित ,

टहनी सी टाँगे ,बढ़ा सा पेट ,

टेढ़े मेढ़े , विकलांग घृणित !


विज्ञान  चिकित्सा से वंचित,

ये नहीं धात्रीयों (माँ ) से रक्षित 

ज्यों स्वास्थ्य सेज हो , ये सुख से 

लोटते धूल में चिर परिचित !


पशुओ सी भीत (दिवार )मूक(गूंगा ) चितवन(दृष्टि ) 

प्राकृतिक स्फूर्ति से प्रेरित मन ,

तृण तरुओं - से - उग बढ़, झर - गिर 

ये  ढोते जीवन क्रम के क्षण !


कुल मान न करना इन्हे वहन ,

चेतना ज्ञान से नहीं गहन ,

जग जीवन धारा  में बहते 

ये मूक ,पंगु बालू के कण !


कर्दम में पोषित जन्मजात ,

जीवन ऐश्वर्य न इन्हे ज्ञात,

ये सुखी या दुखी ? पशुओ-से 

जो सोते -जगते सांझ -प्रांत !


इन कीड़ो का भी मनुज बीज ,

ये सोच ह्रदय उठता पसीज ,

मानव प्रति मानव की विरक्ति 

उपजाति मन में क्षोभ खीझ !

                               

                            सुमित्रानंदन पंत 

                                              रचनाकाल  फ़रबरी ४० 



   अपठित  पद्यांश 

अपठित  पद्यांश 

"गाँव के लड़के" सुमत्रानन्दन पंत , 

                       
                         कोई खंडित, कोई कुंठित,

कृश(कमज़ोर ) बाहु, पसलियाँ रेखांकित ,

टहनी  सी टाँगे ,बढ़ा सा पेट ,

टेढ़े - मेढ़े , विकलांग घृणित !

विज्ञान  चिकित्सा से वंचित,

ये नहीं धात्रीयों(माँ ) से रक्षित 

ज्यों स्वास्थ्य सेज हो , ये सुख से 

लोटते धूल में चिर परिचित !

पशुओ सी भीत (दिवार )मूक(गूंगा ) चितवन(दृष्टि ) 

प्राकृतिक स्फूर्ति से प्रेरित मन ,

तृण तरुओं - से - उग बढ़, झर - गिर 

ये  ढोते जीवन क्रम के क्षण !

कुल मान न करना इन्हे वहन ,

चेतना ज्ञान से नहीं गहन ,

जग जीवन धारा  में बहते 

ये मूक ,पंगु बालू के कण !

"गाँव के लड़के" सुमत्रानन्दन पंत ,
"गाँव के लड़के" सुमत्रानन्दन पंत 
कर्दम में पोषित जन्मजात ,

जीवन ऐश्वर्य न इन्हे ज्ञात,

ये सुखी या दुखी ? पशुओ-से 

जो सोते -जगते सांझ -प्रांत !

इन कीड़ो का भी मनुज बीज ,

ये सोच ह्रदय उठता पसीज ,

मानव प्रति मानव की विरक्ति 

उपजाति मन में क्षोभ खीझ !

    

                          सुमित्रानंदन पंत 


निम्नलिखित में से निर्देशानुसार सबसे उचित विकल्पों का चयन कीजिये :--

प्रश्न *  काव्यांश आपके अनुसार किस विषय पर लिखा गया है ?

    १. गाँव के बच्चो में कुपोषण की समस्या। 

   २. गॉंव के बच्चो में चेतना ज्ञान का आभाव। 

  ३. गाँवो में चिकित्सा सुविधाओ का अभाव। 

४.   गाँव के बच्चों की दयनीय दशा का वर्णन। (उत्तर)

प्रश्न * दूसरे पद में कवि कह रहा है कि ?

 १.    गाँव में विज्ञान की शिक्षा नहीं दी जा रही है। (उत्तर)

         २. गाँव में शिशु जन्म हेतु पर्याप्त दबाइयाँ नहीं है। 

         ३. गांव में बच्चे स्वास्थ्य के प्रति  सजग रहकर शारीरिक व्यायाम कर रहे हैं। 

         ४. गाँव में बच्चे अपने मित्रो के साथ धूल में कुस्ती जैसे खेल खेल रहे है। 

प्रश्न * गाँव के बच्चो की स्थिति कैसी है ?

१.   कुपोषित , खिन्न तथा अशिक्षित है। (उत्तर)

         २. छणिकाय किन्तु कुल के मान का ध्यान रखने वाले हैं। 

         ३. प्राकृतिक वातावरण में रहते हुए स्फूर्ति से भरे हुए हैं। 

         ४. पशुओ की तरह बलिष्ठ किन्तु असहाय और मूक हैं। 

प्रश्न * काव्यांश में कवी का रवैया कैसा प्रतीत होता है ?

       १. वे बच्चों की दशा के विषय में व्यंग कर मनोरंजन करना चाह आहे हैं।

        २.  वे बच्चो की दशा की ओर  लोगो का ध्यान आकर्षित करना चाह रहे हैं। 

       ३.  वे तटस्थ (निष्पक्ष )रहकर बच्चो की शारीरिक व  मानसिक दशा का वर्णन कर रहे हैं। (उत्तर)

      ४. वे बच्चो की शारीरिक और मानसिक दशा से संतुष्ट  प्रतीत हो रहे है। 

 प्रश्न * तृण - तरुओं से उग - बढ़ ,इस पंक्ति का अर्थ है ?

      १. घास - फूस की तरह हलके हैं इसलिए तिनको की तरह उड़ रहे हैं। 

      २.   पौधों तथा घास की तरह बिना कुछ खाए  पिए रहे हैं। 

      ३.  घास तथा पौधों की तरह पैदा हो रहे हैं तथा मर रहे हैं। (उत्तर)

     ४. प्राकृतिक वातावरण में घास व पौधों की तरह फल - फूल रहे है। 



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