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शुक्रवार, 2 जुलाई 2021

kavita ,कविता, बचपन, bachpnमहादेवी वर्मा, जीवन परिचय ,संस्करण ,उपलब्धि ,प्रश्नो के हल ।

 


   kavita ,कविता, बचपन, bachpnमहादेवी वर्मा, जीवन परिचय ,संस्करण ,उपलब्धि ,प्रश्नो के हल, मेरी खुद की अभिव्यक्ति    

 महादेवी वर्मा जी का जीवन परिचय :--

  1*  महादेवी वर्मा जी का जन्म 26 मार्च1907 ई. में हुआ था।

2* उनका जन्मस्थान उत्तर प्रदेश के फ़ार्रुखावाद में हुआ था। 

3* महादेवी वर्मा जी की माता का नाम हेमरानी देवी और पिता का नाम गोपाल प्रसाद वर्मा था।

4* उनकी मित्रता सुभद्रा कुमारी चौहान से, क्रास्थवेट कॉलेज-इलाहाबाद में हुई थी।

5* 1933 में जिस समय महिलाओं को बस घर के काम - काज और पर्दे में रहने की अनुमति थी, उस समय महादेवी वर्मा जी ने संस्कृत विषय से एम. ए में उतीर्णता हासिल कर ,प्रयाग महिला विद्या पीठ की प्रिंसिपल थी।

6* 1916 में महादेवी वर्मा जी, श्री स्वरूप नारायण वर्मा जी के साथ परिणय बंधन में बंध कर सांसारिक जीवन मे प्रवेश किया।

7* सन् 1966 में महादेवी वर्मा जी के पति का देहान्त हो गया।

8* और महादेवी वर्मा जी का देहावसान 11 सेप्टेम्बर 1987 मे, इलाहाबाद में ही हो गया।

9* महादेवी वर्मा जी की प्रारंभिक कविताओं की भाषा ब्रज थी और बाद में उन्होंने खड़ी बोली मे लिखना सुरु किया।

10*  महादेवी वर्मा जी की बाल कविताओं का नाम इस प्रकार है-  ठाकुर जी भोले हैं,  आज खरीदेंगे हम ज्वाला।

11* उनकी गद्द रचनाओं का नाम है- (रेखाचित्र) अतीत के चलचित्र 1941, स्मृति की रेखाएँ 1943 जी बहुत ही प्रशिद्ध है।

12* महादेवी वर्मा जी की संस्मरण:--१* पथ के साथी 1956, २* मेरा परिवार 1972

13* महादेवी वर्मा जी की लिखी हुई निबंध :--

१* श्रृंखला की कड़ियां 1942 ईसवी 

२* साहित्यकार की आस्था 1962 ईसवी

३* संकल्पिता 1969 ईसवी।

14* महादेवी वर्मा जी ने ललित निबंध की भी रचना की थी, जिसका नाम है- "क्षणदा"1956

15* उन्होंने कहानी भी लिखी थी जिसका नाम है- गिल्लू।

16* संपादकी में भी महादेवी वर्मा जी ने अच्छी छाप छोड़ी -"चाँद" तथा "साहित्यकार" जैसे  मासिक पत्रिका की सम्पादक भी रही। 

17 * महादेवी वर्मा जी की कविता संग्रह है , इस प्रकार है-

निहार 1930, रश्मि 1932, नीरजा1934, सांध्यगीत 1936, दीपशिखा 1942, सप्तवर्णा(अनुदित) 1959, प्रथम आयाम 1974, अग्नि रेखा 1990.

18* महादेवी वर्मा जी छायावादी कवयित्री थी।

19* महादेवी वर्मा जी ने साहित्यकार संसद और रंगवाणी संस्था की भी स्थापना की थी।

20* उन्होंने बंगाल से भी संबंधित कविता'बंग भू सत वंदना' की भी रचना की थी।

21* इतना ही नहीं, महादेवी वर्मा जी ने चीन के आक्रमण के प्रतिवाद में भी 'हिमालय काव्य संग्रह ' का भी सम्पादन किया था।

22* महादेवी वर्मा जी को - मंगला प्रशाद पारितोषिक तथा भारत भारती पुरस्कार से भी 1943 में सम्मानित किया गया था।

23* पद्मभूषण सम्मान से 1956 ई. मेंऔर पद्मविभूषण सम्मान से 1988 ई. में महादेवी वर्मा जी को सम्मानित किया गया था।

24* महादेवी वर्मा जी साहित्य अकादमी की सदस्यता-1979 में हासिल करने वाली पहली महिला थी।

25* महादेवी वर्मा जी को सेक्सरिया पुरस्कार- 1934 में और ज्ञान पीठ पुरस्कार 'यामा ' नामक काव्य संग्रह पर 27 अप्रैल 1982 को मिला था।

26* महादेवी जी का संस्मरण ' चीनी भाई' पर निर्माता मृणाल सेन ने फ़िल्म भी बनाई थी।

27* महादेवी वर्मा जी की साहित्यिक विशेषता थी कि उनमे भावात्मक अनुभूति की गहनता, प्रेम की पीर, भावो की तीब्रता को बहुत ही सुंदर तरीके से परिभाषित करना आता था।

28* उनको उपनाम आधुनिक मीरा से भी नवाज़ा गया था।

29* महादेवी वर्मा जी के लिए इससे बड़ा सम्मान क्या हो सकता था कि, ख़ुद सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी ने उन्हें " विशाल मंदिर की सरस्वती" कहा था।


 kavita ,कविता, बचपन, bachpnमहादेवी वर्मा, जीवन परिचय ,संस्करण ,उपलब्धि ,प्रश्नो के हल।


बार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी।

गया, ले गया तू बचपन की सबसे मस्त खुशी मेरी।।


चिन्ता रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्भय स्वक्षन्द।

कैसे भुला जा सकता है, बचपन का अतुलित आनंद ?


ऊँच-नींच का ज्ञान नही था, छूआ- छूत किसने जानी ?

बनी हुई थी वहाँ झोपड़ी और चीथड़ों में रानी।


किये दूध के कुल्ले मैंने चूस अँगूठा सुधा पिया।

किलकारी किल्लोल मचाकर सुना घर आवाद किया।।


रोना और मचल जाना भी क्या आनंद दिखाते थे ?

बड़े-बड़े मोती-से आँसू जयमाला पहनाते थे।।


मैं रोइ, माँ काम छोड़कर आई, मुझको उठा लिया।

झाड़-पोछकर चुम-चुम, गीले गालो को सुख दिया।।


दादा ने चंदा दिखलाया नेत्र  नीर - युत दमक उठे।

धुली हुई मुस्कान देखकर सबके चेहरे चमक उठे।।


यह सुख का साम्राज्य छोड़कर मैं मतवाली बड़ी हुई।

लूटी हुई, कुछ ठगी हुई - सी दौर द्वार पर खड़ी हुई।।


लाज भरी थी आंखे मेरी मन मे उमंग रंगीली थी

तान रसीली थी कानो में, चंचल छैल-छबीली थी।।


दिल मे एक चुभन - सी थी, यह दुनिया अलबेली थी।

मन मे एक पहेली थी, मैं सबके बीच अकेली थी।।


मिला, खोजती थी जिसको हे बचपन!ठगा दिया तूने।

अरे! जवानी के फंदे में मुझको फसा दिया तू ने।।


सब गलियाँ उसकी भी देखी उसकी ख़ुशियाँ निराली है।

प्यारी, प्रीतम की रंग-रलियों की , स्मृतियाँ भी न्यारी है ।।


माना मैंने, युवा - काल का जीवन खूब निराला है।

आकांक्षा,परुषार्थ, ज्ञान का उदय मोहने वाला है।।


किंतु यहाँ झंझट हैं, भारी युद्ध क्षेत्र संसार बना।

चिन्ता के चक्कर में परकर, जीवन भी है भर बना।।


आ जा बचपन! एक बार फिर दे-दे अपनी निर्मल शांति।

व्याकुल व्यथा मिटानेवाली वह अपनी प्राकृत विश्रांति।।


वह भोली -सी मधुर सरलता , वह प्यारा जीवन निष्पाप।

क्या फिर आकर मिटा सकेगा , तू मेरे मन का संताप ?


मैं बचपन को बुला रही थी, बोल उठी बिटिया मेरी।

नंदन वन-सी फूल उठी यह छोटी-सी कुटिया मेरी।।


" माँ ओ " कहकर बुला रही थी मिट्टी ख़ाकर आई थी।

कुछ मुँह में, कुछ लिए हाथ मे मुझे खिलाने आई थी।।


पुलक रहे अंग दृगों में, कौतूहल था छलक रहा।

मुँह पर थी आह्लाद लालिमा, विजय गर्व था, झलक - रहा।।


मैंने पूछा, "यह क्या लाई? "बोल उठी वह, " माँ काओ"।

हुआ, प्रफुल्लित हृदय खुशी से मैंने कहा- "तुम्ही खाओ"।।


पाया मैंने, बचपन फिर से, बचपन बेटी बन आया।

उसकी मंजुल मूर्ति देखकर, मुझमे नवजीवन आया।।


मैं भी उसके साथ खेलती, खाती हूँ, तुतलाती हूँ।

मिलकर उसके साथ स्वयं, मैं भी बचपन बन जाती हूँ।।


जिसे खोजती थी वर्षो से, अब जाकर उसको पाया ।

भाग गया था मुझे छोड़कर, वह बचपन फिर से आया।।


काव्य के अनुसार कुछ वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के हल ढूंढते है:--


प्रश्न*1 :-- काव्य के अनुसार कवयित्री सबसे ज्यादा किसे याद कर रही थी?

१* अपनी जवानी को

२* अपने बचपन को(उत्तर)

३* अपनी माँ को

४* इनमें से कोई नहीं

प्रश्न* 2 :-- सबसे ज्यादा स्वक्षन्द, कवयित्री उम्र के किस पड़ाव में रही ?

१* जवानी में

२* बचपन मे(उत्तर)

 ३* बुढापे में

४* सभी मे

प्रश्न* 3 :-- उम्र का कौन सा पड़ाव कवयित्री को अच्छे के साथ - साथ झंझट भी लगता है ?

१* बचपन का

२* किशोर का 

३* युवावस्था का(उत्तर)

4* सभी का

प्रश्न * 4 :--काव्य के अनुसार बताइये कि कवियित्री ने अपने बचपन को फिर से कैसे पाया ?

१* बचपन की स्मृति के रूप में

२* अपने सहेली के रूप में

३* अपने बेटी के रूप में(उत्तर)

४* इनमें से कोई नही।

प्रश्न * 5 मिट्टी खाकर कौन आया था ?

१* कवयित्री की बेटी(उत्तर)

२* कवयित्री स्वयं

३* संसार के सभी बच्चे

४* ये सभी

प्रश्न * 6 :-- कवयित्री के बेटी के मुँह पर किस कारण विजय-गर्व झलक रहा था?

१* स्वयं मिट्टी को खाने और अपनी माँ को भी मिट्टी खिलाने के नाम पर लाने के लिए।(उत्तर)

२* माँ के संतोष को देखकर

३* माँ को संग खेलते देखकर

४* उपरोक्त सभी

प्रश्न* 7 :-- कवयित्री को कौन सा जीवन निष्पाप लग रहा रहा था?

१* जवानी का 

२* सहेलियों के साथ बिताए पल का

३* बचपन का(उत्तर)

४* इनमें से कोई नही

प्रश्न* 8 :--काव्य के आधार पर बताईए कि कवयित्री वर्षो से किसे ढूंढ रही थी ?

१* अपनी बेटी को

२* अपने बचपन को (उत्तर)

३* बचपन की सहेली को

४* किसी अपने को

प्रश्न *9 :--प्रस्तुत काव्य में कवयित्री ने किसकी बात की है ?

१* अपने बचपन की

२* बेटी के बचपन की

३* अपने नए बचपन की(उत्तर)

४* इनमें से कोई नही।

प्रश्न1*10 :--" बनी हुई थी वहाँ झोपड़ी और चीथड़ों में रानी" का तातपर्य है कि कवयित्री-

१* बहुत गरीब थी

२* वो झोपड़े में रहती थी

३* कवयित्री को किसी दिखावे का भान नही था(उत्तर)

४* इनमें सभी



मेरी अभिव्यक्ति :-- आज महादेवी वर्मा जी की जीवन परिचय लिखते-लिखते मै इतनी प्रभावित हुई कि, सोचमें पड़ गई। आज भी जहाँ महिलाओं का जीवन बेतुके रिवाजों और बंधनो में ऊनके पंख को कतरने की व्यवस्था है, तो कहीं हर तरह की उपलब्धता होने के बाबजूद भी बहुत औरते या लड़कियां कुछ नही कर पाती है, वहीं इन्होंने आज से करीब 70, 80-90 साल पहले ही इतना सबकुछ अर्जित कर लिया। जबकि आज भी, इस युग मे भी बहुत जगह, औरतो को पर्दे की नसीहत दी जाती है।मैं ये नही कहती कि पश्चिमी सभ्यता को अपनाना अच्छी बात है, लेकिन देशी लिबास में ही सही औरतो को इतनी आज़ादी मिलनी चाहिए कि वो किसी काम को करने से पहले  दुनियादारी के बोझ से ही न दब जाए। हमारी संस्कृति गीता और रामायण से चलती है, जहाँ कहीं भी नही, पर्दे और छुआछूत के बारे में लिखा है। हमारी तो संस्कृति थी कि एक सीता को बचाने के लिए पूरी लंका जला दी गई और  द्रौपदी को अब भी सती मानकर आदर करते हैं।

उम्मीद है मैं जिस तरह से प्रेरित हुई, आपलोगो का भी कुछ उत्साह बढ़ेगा।

पसंद आए तो अपन कमेंट, अपने कुछ सुझाव और फॉलो जरूर करे।

                                    ✍️उपेक्षा🥀






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