कुछ काम करो , कुछ काम करो
जग में रहकर कुछ नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमे यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो, न निरास करो मन को
संभलो कि सुयोग न जाय चला
कब व्यर्थ हुआ, सदुपाय भला
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रसस्त करो अपना
अखिलेश्वर है अवलंबन को
नर हो, न निरास करो मन को
जब प्राप्त तुम्हे सब तत्व यहाँ
फिर जा सकता वह सत्व कहाँ
तुम स्वत्व सुधा रसपान करो
उठके अमरत्व विधान करो
दवरूप रहो भवकानन को
नर हो न निरास करो मन को
निज गौरव का नित ज्ञान रहे
हम भी कुछ है, यह ध्यान रहे
मरणोत्तर गुंजित गान रहेI
सब जाय अभी, पर मान रहे
कुछ हो न तजो निज साधन को
नर हो न, निरास करो मन को
प्रभु ने तुमको कर दान किए
सब वांछित वस्तु विधान किए
तुम प्राप्त करो उनको न अहो
फिर है यह किसका दोष कहो
समझो न अलभ्य किसी धन को
नर हो, न निरास करो मन को
किस गौरव के तुम योग्य नही
कब कौन तुम्हे सुख भोग्य नही
जन हो तुम भी जगदीश्वर के
सब है जिसके अपने घर के
फिर दुर्लभ क्या उसके जन को
नर हो, न निरास करो मन को
करके विधी-वाद न खेद करो
निज लक्ष्य निरंतर भेद करो
बनता बस उधम ही विधि है
मिलती जिससे शुख की निधि है
समझो धिक् निष्क्रिय जीवन को
नर हो, न निरास करो मन को
कुछ काम करो, कुछ काम करो।
✍️ मैथिली शरण गुप्त💐
भावार्थ:--
यह कविता महान कविता मैथिलीशरण शरण गुप्त जी द्वारा रचित प्रोत्साहित भावनाओं से ओतप्रोत है। कवि इस कविता के जरिए, युवाओ एवं लोगो को उनके जिंदगी के प्रति उत्साहित कर उसको सार्थक बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कवि कहते हैं, जब मानव रूप शरीर में आपका जन्म हुआ है, तो इसे व्यर्थ नही जाने दे और काम करके अपने जीवन को सफल बनाए। मानव जीवन व्यर्थ नही जाना चाहिए इसलिए काम करते रहिए और ईश्वर पर छोर दीजिए, आपके सहारे के लिए वो हैं। जब इस पृथ्वी पर तुम्हे सारे अमृत तत्व(सुविधा) प्राप्त है तो मेहनत करो और अमृत का रसपान अर्थात कर्म फल ग्रहण करो और मन को कभी निरास मत करो। जिंदगी में सब भले ही चला जाय पर अपने गौरव का सदा ध्यान रहना चाहिए, और अपने ऊपर विश्वास रख काम करते रहना चाहिए जिससे मारने के बाद सभी आपका गुणगान करे।
कवि कहते है, जब भगवान ने हमे इतना सुंदर शरीर दिया है, फर उसको यूँ व्यर्थ क्यों गवाना, तुम बस अच्छे काम करो फिर ईश्वर है तुम्हारी सहायता के लिए। इस दुर्लभ शरीर को यूं ही व्यर्थ बर्वाद मत करो, तुम मानव हो, निरास मत रहो, काम करो और सब ईश्वर पर छोर दो वो है तुम्हारी सहायता के लिए पर इस जीवन को यूं ही व्यर्थ मत करो।
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