"नर हो, न निरास करो मन को" मैथिली शरण गुप्त द्वारा रचित कविता भावार्थ सहित।
Shikha Bhardwaj
जून 10, 2021
नर हो, न निरास करो मन को कुछ काम करो , कुछ काम करो जग में रहकर कुछ नाम करो यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो समझो जिसमे यह व्यर्थ न हो कुछ तो उपयुक्...
