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सोमवार, 18 जनवरी 2021

अपठित पद्यांश, टकराएगा नहीं आज उद्धत लहरों से ,Mhadevi Varma


टकराएगा नहीं आज उद्धत लहरों से , Mahadevi Varma


टकराएगा नहीं आज उद्धत लहरों से , Mahadevi Varma



अपठित पद्यांश  

टकराएगा नहीं आज उद्धत लहरों से ,

कौन ज्वार फिर तुझे पार तक पहुँचाएगा ?

अब तक धरती अचल रही पैरो के नीचे,

फूलो की दे ओट सुरभि के घेरे खींचे

पर पहुँचेगा पथी दूसरे तट  पर उस दिन ,  

जब चरणों  के नीचे सागर लहराएगा। 

गर्त शिखर बन  उठे लिए भंवरो का मेला ,

हुए पिघल ज्योतिष्क(nakshatra) तिमिर की निश्चल बेला ,

तू मोती के द्वीप स्वप्न में रहा खोजता,

तब तो बहता समय शिला -सा जम जाएगा,

धूल पोछ या कांटे मत गिन ,छाले मत सहला 

मत ठंढ़े संकल्प आंसुओं से तू बहला ,

तुझसे हो यदि अग्नि - स्नान यह प्रलय महोत्सव 

तभी मरण का स्वस्ति - गान जीवन गाएगा  

टकराएगा नहीं आज उन्माद लहरों से 

कौन ज्वार फिर तुझे दिवस तक पहुँचाएगा। 

निम्नलिखित में से निर्देशानुसार विकल्पों का चयन कीजिए :--

 प्रश्न 1 * दिए काव्यांश का क्या उद्देस्य प्रतीत होता है .

१. आत्मविश्वास जगाने हेतु द्रष्टान्त प्रस्तुति। 

उत्तर २. हर हाल में कार्य करने की प्रेरणा। 

३. जागृति व उत्साहित करने हेतु प्रेरणा। 

४. जीवन दर्शन के विषय में प्रोत्साहन। 

प्रश्न 2 * तू मोती के द्वीप स्वप्न में  रहा खोजता - पंक्ति का भाव है ?

१. मोतियों के सामान आंसुओं को स्वप्न में आने वाले सुन्दर द्वीपों पर  नष्ट नहीं करना चाहिए। 

२. मोती के द्वीप खोजने के लिए सागर में दूर -दूर जाकर कष्टदायी विचरण करना होगा। 

उत्तर ३. जीवन संसाधनों के लिए यथार्थ में रहकर प्रयत्न करना होगा। 

४. यदि ऐसा होगा तो जीवन शिला -सा जम जाएगा। 

प्रश्न 3 * तुझसे  हो यदि अग्नि - स्नान पंक्ति का क्या अर्थ है ?

उत्तर १.  यदि जीवन की कष्टतम परिश्थिति झेल लोगे तो जीवन तुम्हारे बलिदान की प्रशंशा करेगा। 

२. यदि तुम आग के दरिया में डूबकर जाने को तैयार हो तो जीवन मरण के बंधन से मुक्त हो सकोगे। 

३. जीवन प्रलय के महोत्सव में आग लगाने वाला ही सफलतम वीर कहलाएगा। 

४. यदि तुम जीवन में बलिदान करोगे तो जग सदा तुम्हारे जीवन की सराहना करेगा। 

प्रश्न ४ * समय को गतिशील करने के लिए क्या आवश्यक है ?

१. समय का सदुपयोग कर मानव कल्याण में लगे रहना।  २. तुच्छ कार्यो में संलग्न न रहकर समय नष्ट होने से बचाना। 

उत्तर ३. अपने हाल की परवाह न करते हुए सकारात्मक भाव से कार्य करते रहना। 

४. 'टाल मटोल - समय का चोर 'कथनानुसार स्वस्ति (शुभ )कार्य करने में टाल मटोल न करना। 

प्रश्न ५ * काव्यांश के अनुसार 'फूलो की ओट और सुरभि के घेरे '-व्यक्ति के जीवन में क्या कार्य कर सकते हैं।?

१. वे व्यक्ति के जीवन को अपनी सुगंध से शांत और एकाग्र कर सकते हैं। 

२. वे अपने औषधीय  गुणों से व्यक्ति का जीवन व्याधिमुक्त कर सकते हैं। 

उत्तर ३. वे उसे लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग से विचलित कर सकते हैं। 

४. फूल उर्वरता और समृद्धि का प्रतिक है। वे जीवन में ईश्वर के प्रति निकटता लाने में सहायक हो सकते हैं। 

  

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