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मंगलवार, 19 जनवरी 2021

अपठित गद्यांश (विज्ञान शिक्षण की तार्किक रूप में उपेक्षा)

                                                                                


अपठित गद्यांश  

विज्ञान - शिक्षण के पक्षधरों ने कल्पना की थी कि शिक्षा में इसकी शुरुआत पारंपारिकता ,कृत्रिमता और पिछड़ेपन को दूर करेगी। यह सोच पुराने समय से चली आ रही -'तथ्य प्रचुर पाठ्चर्या 'जिसके अंतर्गत - आलोचना,चुनौती  सृजनात्मक्ता व विवेचनात्मकता का आभाव था,आदि के कारण पैदा हो रही थी। मानवतावादियों ने सोचा था कि वैज्ञानिक - पद्धतिमध्यकालीन मतवाद के अन्धविश्वाशो को जड़ से मिटा देगी। किन्तु हमारे शिक्षकों ने रासायनिक प्रतिक्रियाओं की समझ को भी प्रेमचंद की कहानीयों  की तरह केवल पढ़ा और रटा कर उन्हें नीरस बना दिया गया। शिक्षा में विज्ञान - शिक्षण सम्मिलित करने के लिए यह तर्क दिया गया था कि इससे बच्चे विज्ञान की खोज से परिचित हो सकेंगे तथा अपने वास्तविक जीवन में घट रही घटनाओ के विषय में कुछ सीखेंगे। वे वैज्ञानिक विधि का अध्ययन कर तार्किक रूप से कैसे सोचना है ,के कौशल में परांगत होंगे। इन उद्देश्यों में से केवल पहले में ही एक सीमित सफलता मिली है। दूसरे या तीसरे में व्यवहारिक रूप से बच्चे कुछ भी नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं। अधिकतर बच्चो से भौतिकी और रसायन विज्ञान के तथ्यों के बारे में कुछ जानने की उम्मीद की जा सकती है  लेकिन वे शायद ही जानते हो कि उनका कम्प्यूटर या कार का इंजन कैसे काम करता है अथवा क्यों उनकी माता जी सब्जी पकाने के लिए उसे छोटे टुकड़े में काटती है। जबकि वैज्ञानिक पद्धति में रूचि रखने वाले किसी भी उज्जवल लड़के को ये बाते सहज रूप से ही ज्ञात हो जाती है। 

वैज्ञानिक पद्धति की शिक्षा अधिकाँश विद्यालयों में भली प्रकार से नहीं दी जा रही है। दरअसल,शिक्षकों ने अपनी सुविधा और परीक्षा केंद्रित सोच के कारण यह सुनिश्चित कर लिया है कि छात्र वैज्ञानिक पद्धति न सीखकर ठीक उसका उल्टा सीखे, अर्थात वे जो बताए उस पर आँख मुंद  कर विस्वास करे और पूछे जाने पर उसे जस का तस परीक्षा में लिख दे।  वैज्ञानिक पद्धति को आत्मसात करने के लिए लम्बे व्यक्तिगत अनुभव तथा परिश्रम और धैर्य पर आधारित वैज्ञानिक मूल्यों की आवस्यकता होती है ,और जब तक इसे संभव बनाने के लिए शैक्षिक या सामाजिक प्रणालियों को बदल नहीं दिया जाता है,वैज्ञानिक तकनीकों में सक्षम केवल कुछ बच्चे ही सामने आएँगे तथा इन तकनीकों को आगे विकसित करने वालो की संख्या इसका भी अंश मात्रा ही होगी। 

निम्नलिखित में से निर्देशानुसार सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए :--

1 * लेखक का तात्पर्य है कि शिक्षकों ने ?

(अ )      अपने सीमित ज्ञान के कारण विज्ञान पढ़ाने में रूचि नहीं ली है। 

(ब )       विज्ञान शिक्षा को लागू करने के प्रयाशो को विफल किया है। (उत्तर)

(स)      बच्चो को अनुभव आधारित ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया है। 

(द )      मानवतावादियों का समर्थन करते हुए कार्य किया है। 

2 * स्कूल शिक्षा में विज्ञान शिक्षण के प्रति लेखक का क्या रवैया रहा है ? 

(अ ) तटस्थ 

(ब ) सकारात्मक 

(स) व्यंग्यात्मक (उत्तर) 

(द ) नकारात्मक 

3 * उपर्युक्त पाठ्यांश निम्नलिखित में से किस दसक में लिखा गया होगा ?

(अ ) 1950 -1960  

(ब ) 1970 -1980 

(स) 1980 -1990 (उत्तर)

(द ) 2000 -2010 

4 * लेखक वैज्ञानिक पद्धति को लागू करने में विफलता के लिए निम्नलिखित में किस कारक को सबसे अधिक जिम्मेदार ठहराता है। 

(अ ) शिक्षक (उत्तर)

(ब ) परीक्षा के तरीके 

(स ) प्रत्यक्ष अनुभव की कमी 

(द ) सामाजिक और शिक्षा प्रणाली 

5 * यदि लेखक वर्तमान समय में आकर विज्ञान शिक्षक का प्रभाव सुनिश्चित करना चाहे तो निम्नलिखित में से किस प्रश्न के उत्तर में दिलचस्पी लेगा ?

(अ ) क्या छात्र दुनिया के बारे में अधिक जानते हैं ?

(ब )क्या छात्र प्रयोगशालाओं में अधिक समय बिताते हैं ?

(स) क्या छात्र अपने ज्ञान को तार्किक रूप से लागू कर सकते हैं ? (उत्तर)

(द ) क्या पाठ्यपुस्तक में तथ्याधारित सामग्री बढ़ी है ?


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