कितना प्रामाणिक था उसका दुःख
लड़की को दान में देते वक्त
जैसे वही उसकी अंतिम पूंजी हो
लड़की अभी सयानी नहीं थी
अभी इतनी भोली, सरल थी
कि उसे दुःख का आभाष तो होता था
लेकिन दुःख बाँचना नहीं आता था
पाठिका थी वह धुंधले प्रकाश की
कुछ तुको और कुछ लयबद्ध पंक्तियों की
भावार्थ :--
ये कविता माँ के दुःख को व्यक्त करती है जो अपनी बेटी को बड़े ही लाड से पाल-पोस कर बड़ा करती है और जब उसकी उम्र उसके माँ की साथी बनने की होती है तब उसे न चाहते हुए भी शादी के परम्परागत नियमो के अनुसार उसे उसके होने वाले वर के हाथो में दान देना पड़ता है। माँ को लगता है जैसे साड़ी जिंदगी भर की कमाई उसे यूँ ही किसी को देना पड़ रहा है। उन्हें लगता है उसकी बेटी इतनी सयानी नहीं हुई है ,वो अभी बहुत भोली और सरल थी। जिसे दुःख का आभाष तो था पर अभी दुःख बांटना नहीं आता था। उसे भविष्य के बारे में अनुमान तो था लेकिन उससे पूरी तरह अवगत नहीं थी। उसे सामाजिक नियम और परम्पराओ का अभी खाश ज्ञान नहीं था , इसलिए उसकी माँ चिंतित थी।
निम्न पद्यांश को पढ़कर प्रश्नो के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए :--
प्रश्न १. :-- किसके दुःख को प्रामाणिक कहा गया है
(क) :-- पिता के
(ख ) :-- माता के (उत्तर)
(ग) :-- लड़की के
(घ) :-- परिवार के
प्रश्न २. :-- लड़की का कन्यादान करते वक्त माँ को अनुभूति हो रही थी -
(क) :-- अत्यंत आनंद की
(ख ) :--अत्यंत अकेलेपन की
(ग) :-- जैसे उसकी अंतिम पूंजी चली गई (उत्तर)
(घ) :-- अत्यंत गर्व की
प्रश्न ३. :-- लड़की के विषय में सत्य नहीं है -
(क) :-- लड़की अभी सयानी नहीं थी
(ख ) :-- वह सरल और भोली थी
(ग):-- उसे दुःख वांचना नहीं आता था
(घ) :-- वह बहुत समझदार थी (उत्तर)
प्रश्न ४. :--' पाठिका थी वह धुंधले प्रकाश की 'पंक्ति का तात्पर्य है -
(क) :-- लड़की पढ़ने में असमर्थ थी
(ख ) :-- वह कम प्रकाश में भी पढ़ लेती थी
(ग) :-- वह भावी जीवन का केवल अनुमान लगा रही थी (उत्तर)
(घ) :-- वह अपना भविष्य अच्छी प्रकार जानती थी
प्रश्न ५. :-- 'तुको और लयबद्ध पंक्तियों' का तात्पर्य है :--
(क) :-- अच्छे गीत
(ख ) :-- सरल कविताएं
(ग) :-- परम्पराएँ एवं सामाजिक नियम (उत्तर)
(घ) :-- कठिन कविताएं


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