फ़ादर को याद करना एक उदास शांत संगीत सुनने जैसा है। उनको देखना करुणा के जल में स्नान करने जैसा था और उनसे बात करना कर्म के संकल्प से भरना था। मुझे 'परिमल' के वे दिन दिन याद आते हैं,जब हम सब एक परिवार रिश्ते में बंधे थे ,जिसके बड़े सदस्य फ़ादर बुल्के थे। हमारे हंसी- मजाक में वह निर्लिप्त शामिल रहते ,हमारी गोष्ठियों में वह गंभीर बहस करते ,हमारी रचनाओं पर वे बेबाक राय सुझाव देते और हमारे किसी भी उत्सव और संस्कार में वे बड़े भाई और पुरोहित जैसे खड़े हो हमें अपने आशीषो से भर देते। मुझे अपना बच्चा और फ़ादर का उसके मुंह में पहली बार अन्न डालना याद आता है और नीली आँखों की चमक में तैरता वात्सल्य भी जैसे किसी ऊंचाई पर देवदार की छाया में खरे हैं।
निम्नलिखित प्रश्नो के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखिए :--
प्रश्न :--१. फादर से बात करना था -
(क) :- ज्ञान का खजाना प्राप्त करना
(ख ) :-- कर्म के संकल्प से भरना (उत्तर)
(ग) :--आत्मीयता को प्राप्त करना
(घ) :-- वाक् कला को सीखना
प्रश्न २. :-- फादर को याद करना था -
(क) :-- ईस्वर का स्मरण करने जैसा
(ख ) :-- स्वर्ग का भ्रमण करने जैसा
(ग) :-- उदाश शांत संगीत सुनने जैसा (उत्तर)
(घ) :-- सुनहरे सपने में खो जाने जैसा
प्रश्न ३. :-- 'परिमल' नाम है -
(क) :-- एक व्यक्ति का
(ख ) :-- एक भवन का
(ग) :- एक साहित्यिक संस्था का (उत्तर)
(घ) :-- एक पत्रिका का
प्रश्न ४. :- घर के उत्सवों में फादर की भूमिका रहती है -
(क) :-- अतिथि की
(ख ):-- बड़े भाई और पुरोहित की (उत्तर)
(ग) :-- एक उदासीन व्यक्ति की
(घ) :-- पारिवारिक सदस्य की
प्रश्न ५ :-- लेखक को याद आ रहा है -
(क) :-- अपना बच्चा
(ख ) :-- फ़ादर का बच्चे के मुंह में पहली बार अन्न डालना (उत्तर)
(ग) :-- फ़ादर की नीली आँखे
(घ) :-- देवदार का वृक्ष


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