विराम चिन्ह (Punctuation )
जब हम कुछ बोलते या लिखते हैं तब हमारी बात को प्रभावशाली बनाने के लिए या ठीक तरह से कहने लिए वाक्यों में कुछ स्थानों पर रुकने या विराम देने की आवश्यकता होती है। ऐसा न हो तो कहने या लिखने के भाव में अर्थ का अनर्थ हो सकता है।
कुछ प्रमुख विराम चिन्हो उदाहरण :--
पूर्ण विराम । निर्देशक चिह्न -
प्रश्नसूचक चिह्न ? योजक चिह्न -
अल्प विराम , कोष्ठक ( )
विषमयादिसूचक चिह्न ! उद्धरण चिह्न " "
पूर्ण विराम :--
जब वाक्य सामान्य रूप से पूरा होता है तब अंत में पूर्ण विराम (। ) लगाया जाता है।
जैसे :-- गौतमी पढ़ती है।
रेहान खेल रहा था।
गौतमी और रेहान पाठशाला गए
प्रश्नसूचक चिह्न :--
प्रश्न का बोध कराने के लिए वाक्य के अंत में प्रश्नसूचक चिह्न (?) का प्रयोग किया जाता है।
जैसे :-- इतना शोर क्यों मचा रही हो ?
पीछे कौन छिपा है ?
Note :--
* जब वाक्य में प्रश्न पूछा जा रहा हो ,लेकिन उसमे निर्देश या आदेश देने का भाव हो तब वाक्य के अंत में प्रश्नसूचक चिह्न के स्थान पर पूर्ण विराम लगाया जाता है।
जैसे :-- आप कौन है,यह तो बताइए।
यह भी लिखो कि तुम उधार कब चुकता करोगे।
अल्प विराम :--
वाक्य में जिस स्थान पर बहुत थोड़ी देर ठहरना हो , वहाँ अल्पविराम ( ,) लगाया जाता है।
जैसे :-- मैंने केले, सेब और अमरुद खरीदे।
चिंता , निराशा और क्रोध हमारे दुश्मन है।
कुछ जानने योग्य बाते :--
* एक ही प्रकार के कई शब्द अथवा वाक्यांश जब साथ- साथ आ जाए और उनके बिच कोई योजक न हो तब प्रत्येक शब्द या शब्दांश के साथ अल्प विराम लगाया जाता है। जैसे :--
राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न में बड़ा प्यार था।
अल्पना आई,एक घंटे तक रुकी और फिर चली गई।
* जब परस्पर सम्बन्ध रखने वाले दी शब्दों के बीच कोई वाक्यांश आकर उन्हें अलग-अलग कर दे तब उस वाक्यांश के दोनों और अल्पविराम लगाया जाता है। जैसे :--
दीपू , जो कल आया था , मे अभिन्न मित्र है।
* किसी वाक्य को उद्धृत करते समय उपवाक्य के पहले अल्प विराम लगता है। जैसे:--
नेता जी पूछा , "क्या आप मुझे वोट देंगे। "
* वाक्य के प्रारम्भ में 'हाँ' या 'नहीं' पर बल देने के लिए अल्प विराम का प्रयोग होता है। जैसे :--
हाँ, हम सब आपको जिताएंगे।
नहीं, मै तो उन्हें वोट नहीं दूंगा।
विष्मायदिवोधक चिह्न :--
मन के भावो , जैसे - हर्ष, घृणा, शोक, आश्चर्य आदि को प्रकट करने के लिए प्रयुक्त शब्दों के साथ विष्मयादिषुचक चिह्न (!) लगाया जाता है। जैसे :--
आह ! मजा आ गया।
ओह ! यह तो बुरा हुआ।
अरे ! आप अभी तक रुके हैं।
छिः ! मै तो बदबू से परेशान हो गई।
निर्देशक चिह्न :--
वाक्य में प्रायः निर्देश के लिए निर्देशक चिह्न (-) का प्रयोग होता है। इसका प्रयोग निम्नलिखित रूप से होता है --
* विषय या विभाग सम्बन्धी प्रत्येक शीर्षक के आगे उद्धरण देना हो , वहाँ निर्देशक चिह्न (-)लगाया जाता है।
जैसे :-- हॉल में उपस्थित लोग - नर-नारी , बच्चे-बूढ़े - सभी ठहाका लगाने लगे।
* वाक्य में किसी पद का अर्थ अधिक स्पष्ट करना हो या किसी बात को दुहराना हो तो वहाँ भी इसका प्रयोग होता है। जैसे :-- तुम्हे फिर एकबार मेरी मदद करनी होगी - बस एकबार फिर।
* किसी के कथन को ज्यों - का- त्यों लिखने के लिए कथन के पहले भी इसका प्रयोग होता है। जैसे :--
माँ - बेटा , खाना खा लो।
बेटा - मुझे भूख नहीं है।
योजक चिह्न :--
जब दो शब्दों के बिच आपस में कुछ सम्बन्ध हो तब उसके मध्य में योजक चिह्न (-) लगाया जाता है। जैसे :--
वह रात-दिन परिश्रम करता रहा।
चाय - वाय तो पीला दो।
तुलना करने के लिए सा/सी/से प्रयुक्त करने पर उसके पहले यो
किसी पद का अर्थ अधिक स्पष्ट करने के लिए कोष्ठक( ) का प्रयोग होता है। जैसे :--
वह निरंतर (लगातार ) बोलता रहा।
राजेंद्र बाबू (भारत के प्रथम राष्ट्रपति )बहुत विद्वान् थे।
उद्धरण चिह्न :--
दूसरे की उक्ति , जहाँ बिना किसी परिवर्तन के लिखी जाए ,वहाँ उद्धरण चिह्न (" ")लगाया जाता है और उससे पूर्व अल्पविराम(,) लगता है।
जैसे :-- मैंने पूछा ," तुम्हारा मुंह क्यों सुजा हुआ है ?''
शब्दावली Terminology
पूर्ण विराम = Full Stop प्रश्नसूचक चिह्न = Question Mark अल्पविराम = Coma
विस्मयादिबोधक चिह्न = Exclamation Mark


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