Hi, here we go for all solutions, whatever faced by children.I am there for them always with my pen for whatever comes to my mind, class-3 to10 all problem's solutions, I want to share with my well-wishers and for dear students. I m writing my blog "NCERT books and Solution" for class 3 to 10, mentioned with ncert book and grammar also.

Breaking

शनिवार, 15 मई 2021

रामचरितमानस(गद्यांश और उससे संबंधित प्रश्न)

                                           

   गद्द्यांश 
तुलसी का 'रामचरितमानस' हिंदी - साहित्य की एक कालजई रचना है।  रामचरितमानस  हिंदी का तो सबसे महत्वपूर्ण रचना और उत्कृष्ट महाकाव्य है ही, संसार के उत्कृष्ट महाकाव्य में भी रामचरितमानस की चर्चा की जाती है।  संसार की लगभग सभी महत्वपूर्ण भाषाओ में रामचरितमानस का अनुवाद हो चुका है। रामचरितमानस में वर्णित घटनाएँ और चरित्र तो महान है ही, इसका उद्देश्य भी महान है।  राम की रावण पर विजय - असत्य पर सत्य की और बुराई पर अच्छाई की विजय की प्रतिक है।  मनुष्यत्व की राक्षसत्व पर सदैव विजय होती रहे , यह महान संदेश रामचरितमानस को  कालातीत बनाता है समस्त उत्तर भारत के संस्कारो के निर्माण में रामचरितमानस का महत्वपूर्ण योगदान है। भक्ति और धर्म की दृष्टि से तो यह महान है ही , शुद्ध साहित्य की दृष्टि से भी रामचरितमानस एक उत्कृष्ट महाकाव्य है। इसे पढ़कर कहना पड़ता है --
               'कविता करके तुलसी न लेस ,लसी कविता पा तुलसी की कला। '
'रामचरितमानस' की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसकी रचना लोकभाषा अवधी में हुई है। अवधी में राम का चरित लिखने के कारण काशी के संस्कृत पंडितो ने तुलसी को बहुत धिक्कारा था और उन्हें अनेक यातनाए दी थी। पंडितो का विचार था कि राम - कथा देववाणी संस्कृत में लिखी जानी चाहिए , किसी लोक भाषा में नहीं। उन्हें नहीं पता था कि अवधी में लिखी जाने के कारण रामचरितमानस लोक में इतनी प्रिय हो जाएगी कि कोई दूसरा रचना इसकी समता नहीं कर पाएगी। आज लगभग साढ़े चार सौ वर्ष बाद भी रामचरितमानस की लोकप्रियता कम नहीं हुई , बढ़ी ही है। 
    'मानस'की संवाद - शैली भी आकृष्ट करती है। मानस के चार घाटों पर बैठे चार वक्ता और चार श्रोता - कागभुशुण्डि और गरुड़ ,याग्यवल्क्य और भारद्वाज मुनि , शिव और पार्वती तथा तुलसीदास और पाठक के संवादों के माध्यम से कथा आगे बढ़ती है।  तुलसी ने अपने समय की सभी विचारधाराओ , साधनाओ, भाषा एवं शैलियों का समन्वय कर इसे किसी एक सम्प्रदाय या जाती का ग्रन्थ न बनाकर मानव मात्र के कल्याण का ग्रन्थ बना दिया है। रामचरितमानस में समन्वय की चेष्टा लक्षित होती है और इसी से तुलसी , महात्मा बुद्ध के बाद भारत के सबसे बड़े लोकनायक बन गए।  उन्होंने निर्गुण और सगुन में , ज्ञान और भक्ति में ,शैव और वैष्णव में , शैव और शक्ति में , लोक और शास्त्रों  में , संस्कृत और लोकभाषा में तथा विविध - कार्यशैलियों में समन्वयन कर अपने ह्रदय की विशालता और और उदारता का परिचय दिया है।  तुलसी सगुन के उपासक हैं ,किन्तु सत्य को समझते हैं और कहते हैं -
                 अगुनहिं सगुनहिं नहिं कछु भेद। उभय हरहिं भाव संभव खेदा। 
(क) कौन-सा महँ सन्देश रणचरितमानस को  कालातीत बनता है ?
१) . राम की रावण पर विजय 
२) . वचन की प्रतिबद्धता 
३). मनुष्यत्व की राक्षसत्व पर विजय 
४). सभी विकल्प सही है (उत्तर)
(ख ) रामचरितमानस हिंदी साहित्य की कैसी रचना है ?
१) . कालजयी 
२). कालमयी 
३). महान 
४). श्रेष्ठ  (उत्तर)
(ग) . काशी में संस्कृत पंडितों ने तुलसी को क्यों धिक्कारा था?
१) क्योंकि उन्होंने काशी में रहकर रामचरितमानस की रचना नहीं कि।
२) . क्योंकि उन्होंने रामचरितमानस की रचना अवधि में की।(उत्तर)
३) . क्योंकि उनकी प्रशिद्धि कम हो गई थी।
४). क्योंकि वे वहीं के रहने वाले थे ।
(घ) . तुलसी किस प्रकार की भक्ति के उपासक हैं ?
१). निर्गुण
२). ब्रह्मगुण
३). सतगुण
४) . सगुण (उत्तर)
(ड.) 'उदारता' शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय लिखिए।
(क). ता (ता)
(ख). त
(ग). रता
(घ). उ

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें