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मंगलवार, 6 जुलाई 2021

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kavita ,कविता, "टकरायेगा नही" महादेवी वर्मा, जीवन परिचय ,संस्करण ,उपलब्धि ,प्रश्नो के हल, मेरी खुद की अभिव्यक्ति    

Mahadevi varma (महादेवी वर्मा)


kavita ,कविता, "टकरायेगा नही" महादेवी वर्मा, जीवन परिचय ,संस्करण ,उपलब्धि ,प्रश्नो के हल, मेरी खुद की अभिव्यक्ति    

 महादेवी वर्मा जी का जीवन परिचय :--

  1*  महादेवी वर्मा जी का जन्म 26 मार्च1907 ई. में हुआ था।

2* उनका जन्मस्थान उत्तर प्रदेश के फ़ार्रुखावाद में हुआ था। 

3* महादेवी वर्मा जी की माता का नाम हेमरानी देवी और पिता का नाम गोपाल प्रसाद वर्मा था।

4* उनकी मित्रता सुभद्रा कुमारी चौहान से, क्रास्थवेट कॉलेज-इलाहाबाद में हुई थी।

5* 1933 में जिस समय महिलाओं को बस घर के काम - काज और पर्दे में रहने की अनुमति थी, उस समय महादेवी वर्मा जी ने संस्कृत विषय से एम. ए में उतीर्णता हासिल कर ,प्रयाग महिला विद्या पीठ की प्रिंसिपल थी।

6* 1916 में महादेवी वर्मा जी, श्री स्वरूप नारायण वर्मा जी के साथ परिणय बंधन में बंध कर सांसारिक जीवन मे प्रवेश किया।

7* सन् 1966 में महादेवी वर्मा जी के पति का देहान्त हो गया।

8* और महादेवी वर्मा जी का देहावसान 11 सेप्टेम्बर 1987 मे, इलाहाबाद में ही हो गया।

9* महादेवी वर्मा जी की प्रारंभिक कविताओं की भाषा ब्रज थी और बाद में उन्होंने खड़ी बोली मे लिखना सुरु किया।

10*  महादेवी वर्मा जी की बाल कविताओं का नाम इस प्रकार है-  ठाकुर जी भोले हैं,  आज खरीदेंगे हम ज्वाला।

11* उनकी गद्द रचनाओं का नाम है- (रेखाचित्र) अतीत के चलचित्र 1941, स्मृति की रेखाएँ 1943 जी बहुत ही प्रशिद्ध है।

12* महादेवी वर्मा जी की संस्मरण:--१* पथ के साथी 1956, २* मेरा परिवार 1972

13* महादेवी वर्मा जी की लिखी हुई निबंध :--

१* श्रृंखला की कड़ियां 1942 ईसवी 

२* साहित्यकार की आस्था 1962 ईसवी

३* संकल्पिता 1969 ईसवी।

14* महादेवी वर्मा जी ने ललित निबंध की भी रचना की थी, जिसका नाम है- "क्षणदा"1956

15* उन्होंने कहानी भी लिखी थी जिसका नाम है- गिल्लू।

16* संपादकी में भी महादेवी वर्मा जी ने अच्छी छाप छोड़ी -"चाँद" तथा "साहित्यकार" जैसे  मासिक पत्रिका की सम्पादक भी रही। 

17 * महादेवी वर्मा जी की कविता संग्रह है , इस प्रकार है-

निहार 1930, रश्मि 1932, नीरजा1934, सांध्यगीत 1936, दीपशिखा 1942, सप्तवर्णा(अनुदित) 1959, प्रथम आयाम 1974, अग्नि रेखा 1990.

18* महादेवी वर्मा जी छायावादी कवयित्री थी।

19* महादेवी वर्मा जी ने साहित्यकार संसद और रंगवाणी संस्था की भी स्थापना की थी।

20* उन्होंने बंगाल से भी संबंधित कविता'बंग भू सत वंदना' की भी रचना की थी।

21* इतना ही नहीं, महादेवी वर्मा जी ने चीन के आक्रमण के प्रतिवाद में भी 'हिमालय काव्य संग्रह ' का भी सम्पादन किया था।

22* महादेवी वर्मा जी को - मंगला प्रशाद पारितोषिक तथा भारत भारती पुरस्कार से भी 1943 में सम्मानित किया गया था।

23* पद्मभूषण सम्मान से 1956 ई. मेंऔर पद्मविभूषण सम्मान से 1988 ई. में महादेवी वर्मा जी को सम्मानित किया गया था।

24* महादेवी वर्मा जी साहित्य अकादमी की सदस्यता-1979 में हासिल करने वाली पहली महिला थी।

25* महादेवी वर्मा जी को सेक्सरिया पुरस्कार- 1934 में और ज्ञान पीठ पुरस्कार 'यामा ' नामक काव्य संग्रह पर 27 अप्रैल 1982 को मिला था।

26* महादेवी जी का संस्मरण ' चीनी भाई' पर निर्माता मृणाल सेन ने फ़िल्म भी बनाई थी।

27* महादेवी वर्मा जी की साहित्यिक विशेषता थी कि उनमे भावात्मक अनुभूति की गहनता, प्रेम की पीर, भावो की तीब्रता को बहुत ही सुंदर तरीके से परिभाषित करना आता था।

28* उनको उपनाम आधुनिक मीरा से भी नवाज़ा गया था।

29* महादेवी वर्मा जी के लिए इससे बड़ा सम्मान क्या हो सकता था कि, ख़ुद सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी ने उन्हें " विशाल मंदिर की सरस्वती" कहा था।


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 टकरायेगा नही।

टकरायेगा नहीं आज उद्धत लहरों से ,

कौन ज्वार फिर तुझे पार तक पहुँचाएगा ?


अब तक धरती अचल रही पैरो के नीचे,

फूलो की दे ओट सुरभि के घेरे खींचे

पर पहुँचेगा पथी दूसरे तट  पर उस दिन ,  

जब चरणों  के नीचे सागर लहरायेगा। 

कौन ज्वार फिर तुझे पार तक पहुँचायेगा ?


गर्त शिखर बन  उठे लिए भंवरो का मेला ,

हुए पिघल ज्योतिष्क(nakshatra) तिमिर की निश्चल बेला ,

तू मोती के द्वीप स्वप्न में रहा खोजता,

तब तो बहता समय शिला -सा जम जायेगा,

कौन ज्वार फिर तुझे पार तक पहुँचायेगा ?


तेरी लॉ से दिप्त देव-प्रतिमा की आँखे,

किरणे बनी पुजारी के हित वर की पाँखें,

वज्र-शिला पर गढ़ी ध्वंस की रेखाएं क्या

यह अंगारक हास नहीं पिघला पायेगा ?

कौन ज्वार फिर तुझे पार तक पहुँचायेगा ?


धूल पोछ या कांटे मत गिन ,छाले मत सहला 

मत ठंढ़े संकल्प आंसुओं से तू नहला ,

तुझसे हो यदि अग्नि - स्नान यह प्रलय महोत्सव 

तभी मरण का स्वस्ति - गान जीवन गायेगा ।

कौन ज्वार फिर तुझे पार तक पहुँचायेगा ?


टकरायेगा नहीं आज उद्धत लहरों से 

कौन ज्वार फिर तुझे दिवस तक पहुँचायेगा। 

               


           ✍️ महादेवी वर्मा💐



अपठित पद्यांश  

महादेवी वर्मा(Mahadevi Varma )

टकराएगा नहीं आज उद्धत लहरों से ,

कौन ज्वार फिर तुझे पार तक पहुँचायेगा ?

अब तक धरती अचल रही पैरो के नीचे,

फूलो की दे ओट सुरभि के घेरे खींचे

पर पहुँचेगा पथी दूसरे तट  पर उस दिन ,  

जब चरणों  के नीचे सागर लहरायेगा। 

गर्त शिखर बन  उठे लिए भंवरो का मेला ,

हुए पिघल ज्योतिष्क(nakshatra) तिमिर की निश्चल बेला ,

तू मोती के द्वीप स्वप्न में रहा खोजता,

तब तो बहता समय शिला -सा जम जाए येगा,

धूल पोछ या कांटे मत गिन ,छाले मत सहला 

मत ठंढ़े संकल्प आंसुओं से तू नहला ,

तुझसे हो यदि अग्नि - स्नान यह प्रलय महोत्सव 

तभी मरण का स्वस्ति - गान जीवन गायेगा  

टकरायेगा नहीं आज उद्धत लहरों से 

कौन ज्वार फिर तुझे दिवस तक पहुँचायेगा। 

निम्नलिखित में से निर्देशानुसार विकल्पों का चयन कीजिए :--

 प्रश्न 1 * दिए काव्यांश का क्या उद्देस्य प्रतीत होता है .

१. आत्मविश्वास जगाने हेतु द्रष्टान्त प्रस्तुति। 

उत्तर २. हर हाल में कार्य करने की प्रेरणा। 

३. जागृति व उत्साहित करने हेतु प्रेरणा। 

४. जीवन दर्शन के विषय में प्रोत्साहन। 

प्रश्न 2 * तू मोती के द्वीप स्वप्न में  रहा खोजता - पंक्ति का भाव है ?

१. मोतियों के सामान आंसुओं को स्वप्न में आने वाले सुन्दर द्वीपों पर  नष्ट नहीं करना चाहिए। 

२. मोती के द्वीप खोजने के लिए सागर में दूर -दूर जाकर कष्टदायी विचरण करना होगा। 

उत्तर ३. जीवन संसाधनों के लिए यथार्थ में रहकर प्रयत्न करना होगा। 

४. यदि ऐसा होगा तो जीवन शिला -सा जम जाएगा। 

प्रश्न 3 * तुझसे  हो यदि अग्नि - स्नान पंक्ति का क्या अर्थ है ?

उत्तर १.  यदि जीवन की कष्टतम परिश्थिति झेल लोगे तो जीवन तुम्हारे बलिदान की प्रशंशा करेगा। 

२. यदि तुम आग के दरिया में डूबकर जाने को तैयार हो तो जीवन मरण के बंधन से मुक्त हो सकोगे। 

३. जीवन प्रलय के महोत्सव में आग लगाने वाला ही सफलतम वीर कहलाएगा। 

४. यदि तुम जीवन में बलिदान करोगे तो जग सदा तुम्हारे जीवन की सराहना करेगा। 

प्रश्न ४ * समय को गतिशील करने के लिए क्या आवश्यक है ?

१. समय का सदुपयोग कर मानव कल्याण में लगे रहना।  २. तुच्छ कार्यो में संलग्न न रहकर समय नष्ट होने से बचाना। 

उत्तर ३. अपने हाल की परवाह न करते हुए सकारात्मक भाव से कार्य करते रहना। 

४. 'टाल मटोल - समय का चोर 'कथनानुसार स्वस्ति (शुभ )कार्य करने में टाल मटोल न करना। 

प्रश्न ५ * काव्यांश के अनुसार 'फूलो की ओट और सुरभि के घेरे '-व्यक्ति के जीवन में क्या कार्य कर सकते हैं।?

१. वे व्यक्ति के जीवन को अपनी सुगंध से शांत और एकाग्र कर सकते हैं। 

२. वे अपने औषधीय  गुणों से व्यक्ति का जीवन व्याधिमुक्त कर सकते हैं। 

उत्तर ३. वे उसे लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग से विचलित कर सकते हैं। 

४. फूल उर्वरता और समृद्धि का प्रतिक है। वे जीवन में ईश्वर के प्रति निकटता लाने में सहायक हो सकते हैं। 

महादेवी वर्मा(Mahadevi Varma )


मेरी अभिव्यक्ति :-- आज महादेवी वर्मा जी की जीवन परिचय लिखते-लिखते मै इतनी प्रभावित हुई कि, सोचमें पड़ गई। आज भी जहाँ महिलाओं का जीवन बेतुके रिवाजों और बंधनो में ऊनके पंख को कतरने की व्यवस्था है, तो कहीं हर तरह की उपलब्धता होने के बाबजूद भी बहुत औरते या लड़कियां कुछ नही कर पाती है, वहीं इन्होंने आज से करीब 70, 80-90 साल पहले ही इतना सबकुछ अर्जित कर लिया। जबकि आज भी, इस युग मे भी बहुत जगह, औरतो को पर्दे की नसीहत दी जाती है।मैं ये नही कहती कि पश्चिमी सभ्यता को अपनाना अच्छी बात है, लेकिन देशी लिबास में ही सही औरतो को इतनी आज़ादी मिलनी चाहिए कि वो किसी काम को करने से पहले  दुनियादारी के बोझ से ही न दब जाए। हमारी संस्कृति गीता और रामायण से चलती है, जहाँ कहीं भी नही, पर्दे और छुआछूत के बारे में लिखा है। हमारी तो संस्कृति थी कि एक सीता को बचाने के लिए पूरी लंका जला दी गई और  द्रौपदी को अब भी सती मानकर आदर करते हैं।

उम्मीद है मैं जिस तरह से प्रेरित हुई, आपलोगो का भी कुछ उत्साह बढ़ेगा।

पसंद आए तो अपन कमेंट, अपने कुछ सुझाव और फॉलो जरूर करे।

                                    ✍️उपेक्षा🥀






  

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