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शनिवार, 20 मार्च 2021

अपठित गद्यांश "अहिंशा का अर्थ"


अहिंशा का अर्थ केवल इतना नहीं है कि हम दूसरे प्राणियों पर दया करे। उन्हें न मारे एवं किसी को कष्ट न पहुंचाए। अहिंशा एवं मानवीय संवेदनाएँ , जीवन मूल्य ,आदर्श और सात्विक वृत्तियाँ आदि बहुत कुछ शामिल हैं। अहिंशा सदाचार और विचारो की शुद्धता एवं नैतिक सूत्रों का आधार है ,सर्वधर्म - समभाव की आधारशिला है ,समता सामाजिक न्याय और मानव प्रेम की प्रेरक - शक्ति है। सच्ची अहिंशा वह है जहां इंसान के भेद-भाव न हो ,सारे अंतर हट जाए। असल में अहिंसक जीवन जीना बहुत कठिन है ,बहुत बड़ी साधना है। महात्मा गांधी ने कहा है ,"अहिंशा और सत्य का मार्ग जितना सीधा है, उतना ही दंग भी है। यह तलवार की धार पर चलने के समान है। "भगवान् महावीर ने दुसरो के दुःख दूर करने को "अहिंशा धर्म " कहा है। उनका जीवन आत्म-साधना और सामाजिक मूल्यों को प्रतिष्ठा दिलाने में व्यतीत हुआ। उनको महसूस हुआ कि आर्थिक असमानता और वस्तुओ का अनावस्यक और अनुचित संग्रह सामाजिक जीवन में असंतुलन पैदा करता है। ऐसी लोभ वृत्तियों के कारण एक इंसान दूसरे इंसान का शोषण करता है। इसलिए उन्होंने अपरिग्रह (दान का अस्वीकार) पर जोड़ दिया ,ताकि समाज से आर्थिक असमानता मिट सके। 

निम्नलिखित में से निर्देशानुसार विकल्पों का चयन कीजिए :-- 

प्रश्न 1 . अहिंशा  आधार नहीं है -

क) - सात्विक वृत्तियों और आदर्श जीवन का             ख )-वैचारिक शुद्धता और नैतिक सूत्रों का 

ग)- प्राणियों पर दया और मानवीय व्यवहार का          घ)- आर्थिक असमानता व अनुचित संग्रह का 

उत्तर ( घ ) - आर्थिक असमानता और अनुचित संग्रह का। 

प्रश्न 2 . महावीर ने 'अहीशा धर्म ' किसे कहा ?

क) -  दूसरे के दुःख दूर करने को                                     ख ) - निर्धनों को दान देने को 

ग) - सीधे, सँकरे व पैने मार्ग को                                         घ) - मंदिर जाने और भजन - कीर्तन को  

उत्तर (क) - दूसरे के दुःख दूर करने को। 

प्रश्न 3 महावीर के अनुसार सामाजिक जीवन में असंतुलन का कारण है -

क) - अर्थ का पक्षपातपूर्ण बटबाड़ा                              ख ) - मानव की ईर्ष्या-द्वेष  प्रवृति 

ग) - मानव की शोषण एवं प्रतारणा की चतुराई               घ ) - वस्तुओं का अनावस्यक एवं अनुचित संग्रह 

उत्तर :-- (घ ) वस्तुओं का अनावस्यक एवं अनुचित संग्रह। 

प्रश्न 4 . अपरिग्रह का अर्थ :--

क) - अधिक धन ग्रहण करना                                    ख ) - निरर्थक धन का त्याग 

ग) - आवस्यकता से अधिक धन का त्याग                     घ) - धन-संग्रह में लापरवाही 

उत्तर :-- (ग) आवस्यकता से अधिक धन का त्याग। 

प्रश्न :-- "अहिंशा का अर्थ केवल इतना नहीं है कि हम दूसरे प्राणियों पर दया करे। "- वाक्य का प्रकार है -

क) - संयुक्त         (ख ) - मिश्र       (ग) - साधारण       ( घ) - सरल 

उत्तर :-- (ख ) - मिश्र 


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