धूप की तपन खुद सहने
छाँव सबको देने का प्रण
पेड़ो ने लिया ,
धूप ने बदले में
फूलो को रंगीन
पेड़ो को हरा-भरा कर दिया
हज़ारो मिल चलकर
गई थी जो नदियाँ
और मीठा पानी खारे समंदर को दिया
बदल गया इतना मन समंदर का
रख लिया खारापन पास अपने
और बादलो के हाथ
भेजा मीठे जल का तोहफ़ा
नदियों को फिर जिसने भर दिया।
भावार्थ :-- कवि ने इन पंक्तियों के सहारे प्रकृति के अद्भुत ताल-मेल और सीख देने वाली प्रबृति को व्यक्त किया है। वो लिखते हैं की कैसे वृक्ष हमें धुप से हमारी रक्षा करते है तो धुप उनको हरी-भरी रख रंग-बिरंगे फूलो से सजाती है। हजारो मिल चलकर कैसे नदियाँ समंदर के खारे पानी से मिलती है और खुद भी खारी हो हो जाती है। खारे पानी होने के बावज़ूद समंदर बरसात के जरिये नदियों को फिर से मीठे जल से ही भरता है। यही ताल - मेल अगर मनुष्यो में भी हो तो कोई बड़ी बात नहीं की स्वर्ग बन जाएगी।
निम्नलिखित में से निर्देशानुसार विकल्पों का चयन कीजिए :--
प्रश्न 1 . पेड़ो की प्रतिज्ञा है -
(क) सबको फल देना ( ख ) धूप की तपन लेना (ग) स्वयं कष्ट उठाकर सुख देना (घ) संसार का करना
उत्तर :-- स्वयं कष्ट उठाकर सुख देना।
प्रश्न 2 . बदले में धूप पेड़ो को देती है :--
(क) शीतल छाया ( ख )फूलो की सुगंध (ग )पत्तियों की हरियाली ( घ ) शाखाओ की मजबूती
उत्तर:-- (ग) पत्तियों की हड़ियाली।
प्रश्न 3 . नदियाँ हज़ारो मिल किसलिए चलती है ?
(क) प्राणियों की प्यास बुझाने के लिए (ख ) विश्व में मानवता की ज्योति जले
(ग) व्यक्ति दूसरे के सुख के लिए विकल हो जाए (घ) प्रत्येक व्यक्ति दूसरे के सुख को अपना सुख समझे
उत्तर :-- प्रत्येक व्यक्ति दूसरे के सुख को अपना सुख माने।
प्रश्न 4 . सागर नदियों का ऋण चुकाता है -
(क) उनके मीठे पानी को स्वीकार कर (ख )उनको खारे जल का उपहार देकर (ग) मेघो के माध्यम से मीठा जल भेजकर (घ) नदियों की बाढ़ का कारण बनकर
उत्तर :-- (ग) मेघो के माध्यम से मीठा जल भेजकर।
प्रश्न 5 . कविता का संदेश -
(क) जैसे के साथ तैसा व्यवहार (ख ) अपकारी के प्रति उपकार
(ग) उपकारी के प्रति गहन कृतज्ञता (घ) कृतघ्नता जीवन का अभिशाप
उत्तर :-- (ग) उपकारी के प्रति गहन कृतज्ञता


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