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बुधवार, 21 अप्रैल 2021

विकारी शब्द - सर्वनाम (Declinable Words - Pronoun),विकारी शब्द-विशेषण(Declinable words-adjective),विकारी शब्द - क्रिया (Declkinable Words-Verb) .


विकारी शब्द - सर्वनाम  (Declinable Words - Pronoun)

संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द सर्वनाम कहलाते हैं। 

सर्वनाम के भेद :-- सर्वनाम के छः भेद होते हैं -

पुरुषवाचक सर्वनाम 

 निश्चयवाचक सर्वनाम 

 अनिश्चयवाचक सर्वनाम 

प्रश्नवाचक सर्वनाम 

 निजवाचक सर्वनाम

 और सम्बन्धवाचक सर्वनाम। 

*  पुरुषवाचक सर्वनाम :--

                                    जो सर्वनाम शब्द बोलने वाले , सुनने वाले या जिसके बारे में कहा जाए , उसके लिए प्रयुक्त होता है , वह पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाता है। 

जैसे :-- मैं ताजमहल देखने जाऊँगा। 

            हम मेला घूमने जाएंगे। 

            तुम कहाँ जा रहे हो। 

           आप भी चलिए न !

          वह बिस्तर पर सोया है। 

          वे आ ही रहे होंगे। 

इन वाक्यों में 'मै ', 'हम', 'तुम', 'आप', 'वह' और 'वे' पुरुषवाचक सर्वनाम है। 

पुरुषवाचक सर्वनाम के तीन उपभेद होते हैं।-

उत्तम पुरुषवाचक :-- बोलने वाला अपने लिए जिस सर्वनाम का उपयोग करता है , वह उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाता है। 

जैसे :-- मै ,हम, मुझे, मुझको, हमें, हमको। 

मध्यम पुरुषवाचक :-- जिससे बात की जाती है , उसके नाम के स्थान पर आने वाला सर्वनाम मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाता है। 

जैसे :-- तू, तुम, आप, तुझे, तुम्हे, तुमको,आपको। 

अन्य पुरुषवाचक :-- जिसके बारे में बात की जाए , उसके नाम के पर आने वाला सर्वनाम अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाता है। 

जैसे :-- वह,  ये, यह, वे, उसे, उन्हें, उसको, उनको, इसे, इन्हे।

* निश्चयवाचक सर्वनाम :-- किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत करने वाला सर्वनाम निश्चयवाचक  कहलाता है। 

जैसे:-- यह मेरा घर है।   वह नीता की साइकल है।     ये गुलाब के फूल हैं।        वे आम के पेड़ हैं। 

Note :-- 

      *      'वह ' अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम है लेकिन कीसी निश्चित संज्ञा शब्द की ओर संकेत करने पर यह निश्चयवाचक सर्वनाम बन जाता है। 

जैसे :-- वह आज आएगा। (अन्यपुरुषवाचक सर्वनाम )

           वह मेरी कलम है। (निश्चयवाचक सर्वनाम )

*       निश्चयवाचक सर्वनाम जब निश्चित संज्ञा की ओर संकेत करता है और उसके ठीक पहले आता है तब विशेषण बन जाता है। 

जैसे :-- वह मेरी कलम है। (निश्चयवाचक सर्वनाम)

            वह कलम मेरी है। (विशेषण )

अनिश्चयवाचक सर्वनाम :-- किसी अनिश्चित व्यक्ति या वस्तु के लिए प्रयुक्त होने वाला सर्वनाम अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहलाता है। 

जैसे :-- कृपया करके कुछ तो दे दीजिए। 

            शायद आज कोई जोर आएगा। 

इन वाक्यों में ,'कुछ' और 'कोई ' शब्द किन संज्ञा शब्दों के लिए प्रयुक्त हुआ है , यह निश्चित नहीं है। अतः ये दोनों शब्द अनिश्चयवाचक सर्वनाम हैं। 

Note :-- 'कुछ' और 'कोई' जब संज्ञा के साथ ठीक उसके पहले आए तब यह विशेषण बन जाता है। 

जैसे :-- आपको कुछ चाहिए क्या ? (सर्वनाम)     आपको कुछ रूपये चाहिए क्या? (विशेषण)

        मेरा ध्यान कोई जरूर रखेगा।   (सर्वनाम )     मेरा ध्यान कोई व्यक्ति जरूर रखेगा। (विशेषण)

*  प्रश्नवाचक सर्वनाम :-- जिस सर्वनाम का प्रयोग किसी व्यक्ति या वस्तु के सम्बन्ध में प्रश्न पूछने के लिए होता है ,वह प्रश्नवाचक सर्वनाम कहलाता है। 

जैसे :-- कौन जानता था कि मोदी जी प्रधान मंत्री बन जाएंगे। 

         पापा! आप मेरे लिए क्या लेकर आएँगे?

इन वाक्यों में 'कौन' और 'क्या' का प्रयोग संज्ञा शब्दों के स्थान पर हुआ है। अतः 'कौन' और 'क्या' प्रश्नवाचक सर्वनाम है। 

* निजवाचक सर्वनाम :--

                                       जो शब्द संज्ञा या पुरुषवाचक सर्वनाम के साथ अपनापन का बोध करता है , वह निजवाचक सर्वनाम कहलाता है।  

जैसे :-- मै उसे देखने के लिए स्वयं गया था। 

          नीतू अपने-आप चली जाएगी। 

रहने दो, मै आप ही सारा काम कर लूंगा। 

Note :-- ' आप' का प्रयोग जब सुनने वाले के लिए होता है तब यह माध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाता है लेकिन इसका प्रयोग जब अपने लिए करना हो तब यह निजवाचक सर्वनाम कहलाता है। 

* सम्बन्धवाचक सर्वनाम :-- जिस सर्वनाम का प्रयोग किसी अन्य उपवाक्य में  प्रयुक्त संज्ञा या सर्वनाम से सम्बन्ध बताने के लिए किया जाता है , वह सम्बन्धवाचक सर्वनाम कहलाता है। 

जैसे :-- जो डुबकी लगाएगा वही मोती पाएगा। 

              जैसा करोगे वैसा भरोगे। 



विकारी शब्द - विशेषण (Declinable words -Adjective)

संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द विशेषण कहलाते  हैं। 

* विशेषण शब्द रूप -रंग ,गुण -दोष ,संख्या,परिमाण, आदि से सम्बंधित विशेषता बताते हैं। 

* विशेषण जिनकी विशेषता बताते हैं , वे विशेष्य कहलाते हैं। 

जैसे :-- समझदार युवक - 'समझदार' विशेषण है जबकि 'युवक ' विशेष्य। 

              घने जंगल - 'घने विशेषण है जबकि 'जंगल ' विशेष्य। 

विशेषण के भेद :-- 

विशेषण के चार भेद होते हैं :--

1 * गुणवाचक विशेषण :- -  जब विशेषण शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम के रूप - रंग , गुण -दोष, दशा-अवस्था, आकार-प्रकार आदि का बोध कराता है तब वह गुणवाचक विशेषण कहलाता है। 

जैसे :-- रीता खूबसूरत है। 

              पपीते का बीज काला होता है। 

               तरबूज मीठा है। 

                संतरा गोल होता है। 

इन वाक्यों में 'खूबसूरत ', 'गोल', 'काला', 'मीठा ', विशेषता बताने वाले गुणवाचक विशेषण शब्द है। गुणवाचक विशेषण कई प्रकार की विशेषाएं बताने वाले शब्द होते हैं। 

जैसे :--

गुण -दोष :-- ईमानदार, दयालु, पवित्र, अच्छा, परिश्रमी, चतुर, चंचल , परोपकारी, बुद्धिमान , बेईमान, धूर्त                                   इत्यादि। 

आकार-प्रकार :-- लंबा, ठिगना, मोटा, पतला , ऊंचा, चौकोर,तिकोना, चौरा, गोल , चपटा। 

रंग-रुप :-- काला , लाल, हरा, गोरा, आकर्षक ,खूबसूरत , सुनहरा, पीला। 

दशा-अवस्था :-- कमजोर, अमीर , गरीब, बलवान, रोगी, उदास, प्रसन्न। 

दिशा-स्थान :-- पूर्वी,पश्चिमी, उत्तरी, दक्षिणी, भारतीय, जापानी, शहरी, ग्रामीण, देहाती ,विदेशी। 

स्वाद :-- खट्टा, मीठा, नमकीन, कड़वा, मधुर, फीका। 

2 * संख्यावाचक विशेषन :--

                                          जब विशेषण शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की संख्या या क्रम का ज्ञान करता है तब वह संख्यावाचक विशेषन कहलाता है। 

जैसे :--

तीन बच्चे टिकट ले रहे थे। 

कतार में कुछ बच्चे खड़े थे। 

कतार में खड़ा आठवाँ बच्चा रिजवान है। 

इन वाक्यों में, 'तीन ' और 'कुछ' संख्या का बोध करा रहे हैं। जबकि 'आठवाँ ' क्रम का बोध करा रहा है। अतः ये संख्यावाचक विशेषण है। 

संख्यावाचक विशेषण किसी निश्चित संख्या या क्रम का भी बोध करा सकते हैं। 

जैसे :-- मैंने दो रोटियाँ खाई।           (निश्चित संख्या )

          उसने प्रथम पुरस्कार जीता।   (निश्चित क्रम)

           कुछ लोग मुझसे मिलने आए थे (अनिश्चित संख्या )

3 * परिमाणवाचक विशेषण :--

                                        जब विशेषण शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की मात्रा या परिमाण का बोध करता है तब वह परिमाणवाचक विशेषण कहलाता है। 

जैसे :-- दीपक ने थोड़ा दूध पिया। 

            रोहन ने पाँच मीटर कपड़ा ख़रीदा। 

इन वाक्यों में 'थोड़ा ' और 'पाँच मीटर ' परिमाण का बोध करा रहे हैं। अतः ये परिमाणवाचक विशेषण है। 

परिमाणवाचक विशेषण निश्चित परिमाण का बोध करा सकते हैं और अनिश्चित परिमाण का भी। 

जैसे :-- एक पाव चीनी लेकर आओ।  (निश्चित परिमाण )

           थोड़ी चीनी लेकर आओ।              (अनिश्चित परिमाण)

'कुछ', 'थोड़ा', 'अधिक ' आदि शब्द जब संख्यासूचक शब्दों (जिन्हे गिन सके )के साथ आते हैं तब वे संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं। जब ये  शब्द परिमानसूचक शब्दों (जिन्हे नाप -तोल सके )के साथ आते हैं तब वे परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं। 

जैसे :-- वहाँ कुछ लड़के बैठे थे।                          (संख्यावाचक विशेषण )

            सेठ जी ने भिखारी को कुछ कपडे दिए।     (परिमाणवाचकविशेषण )

4 * संकेतवाचक विशेषण :-- 

                                          जब कोई सर्वनाम शब्द संज्ञा के स्थान पर न आकर उसके साथ ही आता है और संज्ञा की और संकेत करता है तब वह संकेतवाचक विशेषण कहलाता है।  इसे सार्वनामिक विशेषण भी कहा जाता है। 

जैसे :-- यह घर छन्नूमल सेठ का है। 

             वह युवक दफ्तर जा रहा है। 

इन वाक्यों में , 'यह ' और 'वह ' क्रमशः निश्चित संज्ञा 'घर' और 'युवक ' का संकेत दे रहे है। अतः ये संकेतवाचक विशेषण है। 

विशेषण का निर्माण 

कुछ विशेषण शब्द संज्ञा , सर्वनाम , क्रिया और क्रियाविशेषण शब्दों से बनाए जा सकते हैं। 

जैसे :--   

संज्ञा                        विशेषण                                     संज्ञा                                     विशेषण 

झूठ                         झूठा                                          विष                                         विषैला 

प्यास                      प्यासा                                         भारत                                      भारतीय 

अपमान                 अपमानित                                    मूल्य                                       मूलयवान

चाचा                       चचेरा                                          रंग                                           रंगीन 

उद्योग                    औद्योगिक                                   राष्ट्र                                            राष्ट्रीय 

ग्राम                        ग्रामिण                                         रोग                                          रोगी 

चमक                    चमकीला                                      शक्ति                                      शक्तिशाली 

ज्ञान                       ज्ञानी                                            शहर                                          शहरी 

दया                        दयालु                                           समाज                                      सामाजिक 

दुखी                      दुखी                                             सम्मान                                       सम्मानित 

पाप                        पापी                                            सुख                                            सुखी 

सर्वनाम से विशेषण बनाना :--

सर्वनाम                             विशेषण                                  सर्वनाम                                 विशेषण 

कौन                                  कैसा                                      यह                                           ऐसा 

जो                                    जैसा                                        वह                                           वैसा 

क्रिया से विशेषण बनाना 

क्रिया                                 विशेषण                           क्रिया                                           विशेषण

बिकना                             बिकाऊ                           कमाना                                         कमाऊ 

खेलना                             खिलाड़ी                           तैरना                                            तैराक 

चलना                              चालु                                  बसना                                            बसेरा 

टिकना                            टिकाऊ                             लड़ना                                            लड़ाकू 

लिखना                           लिखित                               लूटना                                           लुटेरा 

क्रियाविशेषण से विशेषण बनाना :--

क्रियाविशेषण                          विशेषण                               क्रियाविशेषण                          विशेषण 

आगे                                      अगला                                  ऊपर                                        ऊपरी 

पीछे                                      पिछला                                 बाहर                                         बाहरी 

प्रविशेषण :--

                           कुछ शब्द विशेषण की भी विशेषता बताते हैं। ये प्रविशेषण कहलाते हैं। 

जैसे :-- करेला बहुत कड़वा था। 

             अँधेरे में कई भयानक चेहरे दिखे। 

पहले वाक्य में  'बहुत'  शब्द  'कड़वा '  (विशेषण )की विशेषता बता रहा है। अतः  'बहुत ' और 'कई' प्रविशेषण है। 

शब्दावली (Terminology ):--

विशेषण = Adjective                गुणवाचक विशेषण = Qualitative Adjective                 संख्यावाचक विशेषण = Numeric  Adjective                         परिमाणवाचक विशेषण = Quantitative Adjective 

संकेतवाचक विशेषण = Demonstrative Adjective 

विकारी  शब्द - क्रिया (Declinable Words - Verb )

जिस शब्द से काम के करने या होने का बोध होता है , वह क्रिया कहलाता है। 

                               क्रिया का मूलरूप - धातु 

 नीचे लिखे वाक्यों से समझने की कोशिश करते है :--

वह पत्र लिखता है।                                 मै भी पत्र लिखूँगा। 

वह पत्र लिखेगा।                                    तुम भी पत्र लिखोगे। 

उसने पत्र लिखा।                                    वे भी पत्र लिखेंगे। 

 वाक्यों में 'लिखना ' क्रिया के अलग-अलग रूप आएं हैं। 'लिखना' सामान्य क्रिया  के रूप में जाना जाता है। यह 'लिख + ना ' के मेल से बनी है।  इस क्रिया के विभिन्न रूपों में उसका मूल भाग 'लिख' अवश्य पाया जाता है।  क्रिया के इस मूल भाग को धातु कहा जाता है। 

कुछ अलग - अलग प्रकार की भी क्रियाएं होती है जिनके बारे में भी जानते हैं :--

                                           सामान्य क्रिया एवं संयुक्त क्रिया 

जैसे :--

विराट ने छक्का लगाया। 

आज शिखर नहीं खेलेगा।

सामान्य क्रिया :-- 

इन वाक्यों में एक ही क्रिया का प्रयोग हुआ है , अतः ये सामान्य क्रिया हैं। 

अर्थात , जब वाक्य में एक ही क्रिया का प्रयोग हो तब वह सामान्य क्रिया कहलाता है। 

संयुक्त क्रिया :--

                       जब वाक्य में दो या दो से अधिक क्रियाओ का साथ-साथ प्रयोग हुआ हो तब उनका मेल  संयुक्त क्रिया कहलाता है। 

जैसे :--

       दर्शक स्टेडियम में जा घुसे। 

        वे मैच देखने लगे। 

इन वाक्यों में प्रयुक्त क्रियाएं ,'जा घुसे' और 'देखने लगे', दो-दो क्रियाओ के मेल से बनी है। अतः ये 'संयुक्त क्रियाएं' कहलाएंगी। 

* संयुक्त क्रिया में पहली क्रिया मुख्य क्रिया होती है और दूसरी क्रिया सहायक क्रिया होती है। 

* संयुक्त क्रिया में 'सहायक क्रिया ' अपना अर्थ खो देती है लेकिन यह मुख्य क्रिया के अर्थ में विशिष्टता ला देती है। 

                                                       पूर्वकालिक क्रिया एवं प्रेरणार्थक क्रिया

 पूर्वकालिक क्रिया :--

जब क्रिया की पहचान पूर्वकाल के रूप में होती है ,तो वह क्रिया पूर्वकालिक क्रिया कहलाती है। 

जैसे :-- मिनी भागकर अंदर गई।                      भोलू स्वयं चलकर आया। 

इन वाक्यों में मुख्य क्रियाएं 'गई' और 'आया' है लेकिन उनके पहले क्रमशः भागने 'भागकर'और चलने 'चलकर ' का काम हुआ है। कि पूर्वकाल को दर्शाता है। 

पूर्वकालिक क्रियाएं मूल धातु में 'कर'जोड़कर बनाई जाती है। 

जैसे :--

         हँसना +कर  =  हँस + कर  =  हँसकर 

         जाना + कर  =  जा + कर =  जाकर 

        लिखना + कर  = लिख + कर = लिखकर  

प्रेरणार्थक क्रिया :--

                          कभी- कभी कर्ता  स्वयं काम न करके दूसरे को काम करने के लिए प्रेरित करता है , तब कर्ता की क्रिया प्रेरणार्थक क्रिया कहलाती है। 

जैसे :-- दीपू घर पहुँचा।                                    नेहा ने दीपू को घर पहुँचाया। 

पहले वाक्य में दीपू ने घर पहुँचने का काम स्वयं किया जबकि दूसरे वाक्य में नेहा ने दीपू  को घर पहुंचाया , अर्थात नेहा को पहुँचाने के लिए प्रेरित करवाया , अतः ये प्रेरणार्थक क्रिया कहलाया। 

अकर्मक क्रिया से बनी प्रेरणार्थक क्रिया :--

क्रिया                                        प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया                                 द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया 

गिरना                                         गिराना                                                       गिरवाना 

चलना                                         चलाना                                                        चलवाना 

डरना                                          डराना                                                          डरवाना 

दौड़ना                                        दौड़ाना                                                         दौड़वाना 

पीना                                           पिलाना                                                         पिलवाना 

बोलना                                        बुलाना                                                           बुलवाना 

रोना                                            रुलाना                                                          रुलवाना 

सोना                                           सुलाना                                                          सुलवाना 

हँसना                                           हँसाना                                                         हँसवाना 

सकर्मक क्रिया से बनी प्रेरणार्थक क्रिया :--

क्रिया                         प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया                                        द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया 

खाना                                 खिलाना                                                           खिलवाना 

जितना                                जिताना                                                           जितवाना 

देना                                     दिलाना                                                           दिलवाना 

धोना                                   धुलाना                                                             धुलवाना 

पीना                                    पिलाना                                                           पिलवाना 

लिखना                                लिखाना                                                        लिखवाना 

सीखना                                सिखाना                                                       सिखलाना 

अकर्मक क्रिया एवं सकर्मक क्रिया :--

जिस क्रिया का प्रभाव सीधे कर्ता  पर पड़ता है , उसे अकर्मक क्रिया कहा जाता है। 

जैसे :--

रितिका जा रही है।                                                 बालक सोया है। 

यहाँ क्रिया का प्रभाव सीधे कर्ता पर पड़ता है। 

'आना ', 'जाना', 'हंसना' 'रोना ' , 'सोना ', 'दौड़ना' , 'बैठना' आदि अकर्मक क्रियाएं हैं। 

सकर्मक क्रिया :--

 जिस क्रिया का प्रभाव कर्म पर पड़े , उसे सकर्मक क्रिया कहा जाता है। 

जैसे :-- मोहिनी संतरा छील  रही है। 

              मोहन ने सेब काटा। 

'लिखना', 'पढ़ना', 'देखना ', 'देना ' 'काटना' आदि सकर्मक क्रियाएं हैं। 

*कुछ सकर्मक क्रियाओं के दो-दो कर्म होते हैं।  जैसे:--

प्रेरणा ने दीपिका को बधाई दी। 

इस वाक्य में 'देना' क्रिया के दो-दो कर्म हैं - 'दीपिका' और 'बधाई ' . 

ऐसी क्रिया द्विकर्मक क्रिया कहलाती है। 

* द्विकर्मक क्रिया में पहला कर्म प्रायः प्राणिवाचक होता है और दूसरा कर्म अप्राणिवाचक होता है। 

शब्दावली (Terminology )

क्रिया = Verb        धातु = Root               सामान्य क्रिया = Simpleverb         संयुक्त क्रिया = Compound Verb

            









             

 

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