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मंगलवार, 20 अप्रैल 2021

कारक की पहचान (Recognition of case)


कारक की पहचान (Recognition of case)
संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका सम्बन्ध वाक्य में आए अन्य शब्दों से जाना जाए ,उसे कारक कहा जाता है। इनका पता कुछ चिन्हो , जैसे :-- ने , को , से आदि से चलता है। ये कारक के परसर्ग कहलाते है। 
कारक के भेद :-- 
कारक के आठ भेद होते हैं - कर्ता  कारक , कर्म कारक , करण कारक , सम्प्रदान कारक ,अपादान कारक , सम्बन्ध कारक , अधिकरण कारक और सम्बोधन कारक। 
कर्ता कारक :--
                    वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से कार्य  संपन्न करने वाले का बोध होता है ,कर्ता कारक कहलाता है। इसका परसर्ग ने है। 
जैसे :--
               पीटर  ने  बुलाया। 
                राधा ने गाना गाया। 
यहाँ पीटर और राधा कर्ता कारक  है। 
कभी - कभी वाक्य में कर्ता 'ने' परसर्ग के बिना  भी प्रयुक्त होता है। 
जैसे :-- पीटर मुझे बुला रहा था। 
             राधा गाना गा रही थी। 
सर्वनाम शब्दों के साथ भी 'ने ' परसर्ग जोड़कर लिखा जाता है। 
जैसे :-- मैंने पाठ पढ़ लिया है। 
          
            हमने आपकी बात मान ली है। 
कर्म कारक :-- 
             वाक्य में जिस संज्ञा या सर्वनाम पर कार्य का प्रभाव या फल पड़ता है ,वह कर्म कारक कहलाता है। इसका परसर्ग 'को' है। 
जैसे :-- दीपक ने गौतम को पत्र लिखा। 
             पिता जी ने मोहन को समझाया। 
कभी - कभी वाक्य में कर्म 'को' परसर्ग  के बिना भी प्रयुक्त किया जाता है। 
जैसे :-- राम पुस्तक पढ़ रहा है। 
            रेशमा पत्र लिख रही है। 
सर्वनाम शब्दों के साथ 'को' परसर्ग जोड़कर लिखा जाता है। 
माँ ने आपको बुलाया है। 
उसको  भी साथ ले चलो। 
कर्म के रूप में 'को' परसर्ग के बिना सर्वनाम इस  प्रकार लिखे जाते हैं -
मुझको - मुझे  , हमको - हमें , तुमको - तुम्हे , उसको - उसे , उनको - उन्हें। 
कारन कारक :-- 
वाक्य में जिस संज्ञा या सर्वनाम की सहायता से कार्य संपन्न होता है , वह कर्म कारक कहलाता है। इसका परसर्ग 'से 'है। जैसे :-- चित्रकार ने कूची से  चित्र बनाया। 
                 दीपू ने हथौड़ी से कील ठोकी। 
सम्प्रदान कारक :-- 
                          जिस संज्ञा या सर्वनाम के लिए कार्य संपन्न किया जाता है ,वह सम्प्रदान कारक कहलाता है। इसके परसर्ग को, के लिए है , 
जैसे :-- शबनम ने हामिद के लिए मिठाई खरीदी। 
            शबनम ने हामिद को मिठाई लेकर दी। 
इन वाक्यों में ,मिठाई खरीदने या लाकर देने का कार्य 'हामिद' के लिए संपन्न हुआ है। अतः 'हामिद ' सम्प्रदान कारक है। 
अपादान कारक :--
                                  संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से अलगाव होने के भाव का बोध होता है , वह अपादान कारक कहलाता है। इसका परसर्ग से है।  
जैसे - बिल से चूहा निकला।                                आँख से आँसू टपके। 
इन वाक्यों में 'चूहा ' का अलगाव 'बिल' से हो रहा है और 'आंसू ' का अलगाव  'आँख ' से हो रहा है। अतः 'बिल ' और 'आँख'  अपादान कारक  है। 
सम्बन्ध कारक :--
                            संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका किसी अन्य शब्द के साथ सम्बन्ध होने का बोध हटा है , वह सम्बन्ध कारक कहलाता है। इसके परसर्ग का, की, के है। 
जैसे :-- सेठ का पेट बहार निकला था। 
            सेठ की काय मोटी  थी। 
            सेठ के गाल फुले थे। 
 में , 'पेट' , 'काया', और  'गाल' का सम्बन्ध 'सेठ ' से है। 
अतः 'सेठ' सम्बन्ध कारक है। 
जब सम्बन्ध कारक के रूप में अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम आया हो तब परसर्ग 'का/की/के' सर्वनाम के साथ जोड़कर  प्रकार लिखे जाते है -उसका, उनका, उनकी ,उसकी, उसके , उनके। 
उत्तम पुरुषवाचक और माध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम सम्बन्ध कारक के रूप में इस प्रकार लिखे जाते हैं -
मेरा, मेरी, मेरे, हमारा, हमारे, तुम्हारा, तुम्हारी, तुम्हारे ,आपका , आपकी, आपके। 
अधिकरण कारक :-- 
                                शब्द के जिस रूप से कार्य के आधार या स्थान का बोध होता है ,वह अधिकरण कारक कहलाता है। इसके परसर्ग में, पर है। 
जैसे :-- घर में चोर छिपकर  बैठा है।                            औरत के सिर पर घड़ा रखा है। 
पहले वाक्य में बैठने का  स्थान 'घर' है, जबकि दूसरे वाक्य में घड़ा रखने का स्थान 'सिर ' है। अतः 'घर' और सिर अधिकरण कारक है। 
अधिकरण कारक के रूप में सर्वनाम इस प्रकार लिखे जाते हैं - मुझमे, मुझपर, तुममे, तुमपर ,हममे, हमपर, आपमें, आपपर ,उसमे, उसपर ,उनमे, उनपर। 
सम्बोधन कारक :-- 
                               शब्द के जिस रूप से किसी को पुकारने ,बुलानेया चेतावनी देने का बोध होता है , वह सम्बोधन कारक कहलाता है। 
जैसे :-- हे प्रभु !मेरी रक्षा करो। 
            अरे नीच !कुछ तो शर्म करो। 
            भाइयो! मेरी  विनती सुन लो। 
इन वाक्यों में 'प्रभु',' नीच ' और' भाइयो 'को सम्बोधित किया गया है।  अतः ये सम्बोधन कारक है। 
सम्बोधन कारक के रूप में केवल संज्ञा का प्रयोग होता है इनमे सर्वनाम का प्रयोग नहीं हो सकता। 
जैसे :-- हे तुम, या हे  वह जैसा प्रयोग अशुद्ध  है। 
Note :--  कर्ता , कर्म, करण ,सम्प्रदान, अपादान , और अधिकरण कारको में संज्ञा या सर्वनाम  सम्बन्ध क्रिया के साथ दर्शाया  जाता है। 
सम्बन्ध कारक में संज्ञा या सर्वनाम का सम्बन्ध वाक्य में अन्य संज्ञा के साथ दर्शाया जाता है। 
सम्बोधन कारक में संज्ञा का सम्बन्ध अन्य शब्दों  से नहीं होता है। इसका प्रयोग केवल सम्बोधन के लिए होता है। 

शब्दावली Terminology 
कारक = case       कर्ता कारक = Nominative case                  कर्म कारक = Objective case           करण  कारक = Instrumental case                  सम्प्रदान कारक = Dative case             अपादान कारक = Ablative case                 सम्बन्ध कारक =    Genitive case                 अधिकरण कारक = Locative case   सम्बोधन कारक = Vocative Case             परसर्ग = Past position .              

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