शब्द विचार (Morphology )
वर्णो के मेल या उनके सार्थक समूह , जिनसे कुछ अर्थ स्पष्ट होते हो उन्हें "शब्द " कहते हैं।
जैसे :-कमल , दीपक ,नेता ,नीरज ,सरगम आदि शब्दों के उदाहरण है।
* कुछ शब्द एक वर्ण के भी हो सकते हैं , जैसे :-- न , हाँ , वे।
* कभी - कभी कुछ ऐसे शब्द भी होते हैं जिनका अपना तो कोई अर्थ नहीं होता है,लेकिन जब वो किसी दूसरे शब्द से मिलते हैं तो उससे नया सार्थक शब्द बन जाता है ,जिसे शब्दांश कहते हैं।
जैसे :-- अ + भाव = आभाव भारत + ईय = भारतीय
सुन्दर + ता = सुंदरता अव + काश = अवकाश
स + फल = सफल अप + मान = अपमान
धन + वान = धनवान
शब्दों का वर्गीकरण
शब्दों का वर्गीकरण निम्नलिखित आधारों पर किया जा सकता है :--
1 * प्रयोग के आधार पर :-- अर्थात वाक्य में इसका प्रयोग करने पर परिवर्तन आता है या नहीं,आधार पर शब्दों की पहचान की जाती है विकारी शब्द (संज्ञा , सर्वनाम,विशेषण , क्रिया ) होते हैं। और अविकारी शब्द (क्रिया विशेषण ,सम्बन्ध बोधक, समुच्चय बोधक ,विस्मयादिबोधक ) के रूप में होती है।
2 * उत्पत्ति के आधार पर :-- अर्थात शब्द कहाँ से उत्पन्न हुआ या जन्म हुआ। इस आधार पर शब्दों की पहचान तत्सम ,तत्भव ,देशज और विदेशज शब्दों के रूप में होता है।
3 *रचना के आधार पर :-- अर्थात शब्द कैसे बना। इस आधार पर शब्द की पहचान रूढ़ , योगिक और योगरूढ़ शब्दों के रूप में होती है।
4 * अर्थ के आधार पर :-- अर्थात शब्द क्या अर्थ बता रहा है। इस आधार पर शब्द की पहचान सार्थक शब्दों (समानार्थी ,विलोम , एकार्थी ,अनेकार्थी शब्द शब्द ) और निरर्थक शब्दों के रूप में होती है।
प्रयोग के आधार पर शब्द - भेद
प्रयोग के आधार पर शब्द के दो भेद होते हैं :--
विकारी शब्द
अविकारी शब्द
विकारी शब्द :-- जिन शब्दों के रूप लिंग , वचन ,काल या कारक के अनुसार बदलते हैं , वे विकारी शब्द कहलाते हैं। जैसे :--
लिंग के अनुसार परिवर्तन
बालक पढता है। बालिका पढ़ती है
काल के अनुसार परिवर्तन
उसे जाना है। वह जाएगा।
वचन के अनुसार परिवर्तन
तितली उड़ रही है। तितलियाँ उड़ रही है।
कारक अनुसार परिवर्तन
मै आऊंगा मुझे आना है।
विकारी शब्द चार प्रकार के होते हैं --
1 संज्ञा : -- किसी व्यक्ति, प्राणी, वस्तु ,स्थान या भाव का नाम संज्ञा कहलाता है।
जैसे :-- बच्चा, संध्या , घोड़ा ,चाय, नगर , लखनऊ ,सुंदरता।
2 सर्वनाम :-- संज्ञा के स्थान पर जिस शब्द का प्रयोग किया जाता है , वह सर्वनाम कहलाता है।
जैसे :-- मै , हम , तुम ,वह , वे।
3 विशेषण :-- किसी संज्ञा या सर्वनाम के रूप , रंग, आकार ,स्वभाव आदि की विशेषता बताने वाला शब्द विशेषण कहलाता है।
जैसे :-- अच्छा, बुरा , कला, मोटा , आलसी , चालाक।
4 क्रिया :-- किसी काम के होने या करने का बोध कराने वाला शब्द क्रिया कहलाता है।
जैसे :-- हँसना ,रोना, आना , जाना , खाना , पीना, पढ़ना।
अविकारी शब्द :-- कुछ शब्दों के रूप लिंग, वचन , कारक ,काल के अनुसार नहीं बदलते अर्थात उनका रूप सदैब एक जैसा रहता है , उन्हें अविकारी शब्द कहते हैं।
जैसे :-- कल, और लेकिन, अरे, यहाँ , कहाँ ,शीघ्र आदि।
इन्हे अव्यय भी कहा जाता है।
अविकारी शब्द चार प्रकार के होते हैं।
1 क्रिया विशेषण :-- क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द को क्रिया विशेषण कहते हैं।
जैसे :-- कल , आज, जल्दी, कम ,पहले, अब, जब, तब, सदैब, लगातार, प्रतिदिन, पास, दूर, ऊपर, भीतर , निचे, बहार , आगे ,उतना, जितना, इत्यादि।
2 . सम्बन्ध बोधक :-- संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के दूसरे शब्दों के साथ सम्बन्ध बताने वाले शब्दों को सम्बन्ध बोधक शब्द कहा जाता है।
3 . समुच्चय बोधक :-- दो शब्दों या दो वाक्यों को जोड़ने वाले शब्द को समुच्चय बोधक शब्द कहा जाता है।
जैसे :-- और ,तथा ,एवं ,अन्यथा ,कि इत्यादि।
4 . विस्मयादिबोधक :-- आश्चर्य ,दुःख , घृणा , प्रसन्नता आदि भावो को प्रकट करने वाले शब्दों को विस्मयादिबोधक शब्द है।
जैसे :-- अरे, अहा , ओह, हे, उँह ,वाह , है , शाबाश। छिः।
स्त्रोत के आधार पर शब्द भेद
स्त्रोत के आधार पर शब्दों के चार भेद होते हैं :--
1 . तत्सम :-- संस्कृत के कुछ शब्द अपने मूल रूप में हिंदी में प्रयुक्त होते हैं। ऐसे शब्द तत्सम शब्द कहलाते हैं।
जैसे :-- भिक्षा , अग्नि, अश्रु, ओष्ठ ,मुख।
२. तद्भव :-- संस्कृत के शब्द अपने विकृत रूप अर्थात बदले हुए रूप में हिंदी में प्रयुक्त होते है। ऐसे शब्द तद्भव कहलाते है।
जैसे :-- भीख ,आँसू ,आग ,होठ ,मुँह।
तत्सम और तद्भव शब्द के कुछ उदाहरण :--
तत्सम तद्भव तत्सम तद्भव तत्सम तद्भव
अग्र आगे गृह घर श्वसुर ससुर
अस्थि हड्डी चक्र चक्का रात्रि रात
कर्ण कान दधि दही शाक साग
कर्म काम दन्त दाँत सर्प साँप
कपोत कबूतर पत्र पत्ता सूत्र सूत
कपाट किबाड़ पर्वत पहाड़ हस्त हाथ
गौ गाय मयूर मोर सप्त सात
3. देशज :--हिंदी भाषा में अन्य भारतीय भाषाओ और स्थानीय बोलियों से आकर शामिल हुए शब्द देशज शब्द कहलाते हैं।
जैसे :-- झोला ,लोटा, पेट, जूता ,डिबिया ,खिचड़ी , थाली , टांग , झुग्गी , खिड़की , पगड़ी , लकड़ी ,फावड़ा ,पैसा , झाड़ू ,ठेठ , लथपथ।
4. विदेशज शब्द :-- विदेशी भाषाओ से हिंदी में आकर शामिल हुए शब्द विदेशज शब्द कहलाते हैं।
जैसे :--
अंग्रेजी शब्द - अफ़सर , इंजीनियर ,कॉलेज , कोट , कम्पनी , टेलीफोन ,टैक्स , इत्यादि।
अरबी शब्द - अख़बार , अफ़वाह , अमीर , असर , इनाम , इस्तीफ़ा , क़ानून , कागज़ किराया , इत्यादि।
फ़ारसी शब्द - अंदर , अचार , आज़ादी , ईमानदार , कोशिश , ख़ून , गिरफ़्तार , चम्मच , चश्मा , इत्यादि
तुर्की शब्द - अरमान , कमीज़ , कैंची , तमाशा , तोप।
पुर्तगाली शब्द - साबुन , कमरा , आलू , प्याज़ , कनस्तर , पिस्तौल , गोदाम , नीलाम।
शब्दाबली :-- Terminology
शब्दांश = Particle तत्सम = Tatsam तद्भव = Tadbhav देशज शब्द = Dialect word
विदेशज शब्द = Foreign word
विकारी शब्द =Declinable word अविकारी शब्द = Indeclinable word. सार्थक शब्द = Meaningful word. निरर्थक शब्द = Meaningless word


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