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मंगलवार, 13 अप्रैल 2021

वर्ण विचार (ORTHOGRAPHY)

 


वर्ण विचार :--

                      वर्णो के भेद ,उनके उच्चारण स्थान , वर्णो के संयोग आदि के बारे में जिस अंग की सहायता ली जाती है ,उसे वर्ण विचार के नाम से जाना जाता है। 

 भाषा की सबसे छोटी ध्वनि वर्ण कहलाती है और वर्णो का व्यवस्थित समूह वर्णमाला कहलाता है। 

    हिंदी वर्णमाला में 2 प्रकार के वर्ण हैं -- स्वर और व्यंजन। 

स्वर वर्ण :--

                  वो वर्ण बिना किसी अन्य ध्वनि या वर्ण  की सहायता के बिना  और मुख  से  हवा बिना किसी रुकावट के निकले , स्वर कहलाते हैं।  इनकी संख्या 11 होती है और ये दो प्रकार के होते हैं -

1 . हृस्व स्वर और

 2.  दीर्घ स्वर 

इनकी संख्या :--

अ , आ ,इ , ई , उ , ऊ , ऋ ,ए , ऐ ,ओ  और औ।

हृस्व स्वर :--इन स्वरों  को मूल स्वर कहते हैं और इनके  उच्चारण में कम समय अर्थात एक मात्रा का समय ही लगता है। इनको मूल स्वर कहते हैं। ये हैं -- अ , इ , उ , ऋ। 

दीर्घ स्वर :-- ये वैसे वर्ण हैं जिनके उच्चारण में ज्यादा समय ,अर्थात दो मात्राओ का समय लगता है। 

जैसे :-- आ ,ई ,ऊ ,ए ,ऐ ,ओ ,औ। 

अनुस्वार (ां ) और विसर्ग (ाः )  प्रयोग स्वर वर्णो की भाँती ही  होता है।   ये दोनों वर्ण अयोगवाह कहलाते हैं। 

अनुनासिक (ाँ ) इसका प्रयोग भी स्वर्ण वर्ण की भाँती होता है और उच्चारण करते समय ध्वनि मुंह और नाक दोनों से निकलती है। 

और कीध्वनियो के बीच का वर्ण (ॉ ) है यह आगत स्वर कहलाता है। हिंदी भाषा में यह शब्द अंग्रेजी भाषा से आया है।

हिंदी की संख्या ३ से मिलते - जुलते रूप वाला एक चिन्ह  प्रयुक्त होता है। यह प्लुत स्वर के नाम से जाना जाता है। इसके उच्चारण में और भी ज्यादा समय  है और इसका प्रयोग संस्कृत के कुछ शब्दों (जैसे ॐ )में होता है। 

                                                      व्यंजन वर्ण 

व्यंजन वर्ण का उच्चारण स्वर की सहायता से होता है ,और अगर स्वर रहित करना होता है तो उसमे नीचे  हल चिन्ह लगा दिया जाता है। जैसे :-- क् , ख् , ग् आदि। 

ये तीन प्रकार के होते हैं :-- 

1 * स्पर्श व्यंजन :-- इनका उच्चारण करते समय जीभ, मुख के विभिन्न भागो जैसे - कंठ, तालु, मूर्धा , दन्त , ओष्ठ आदि से पूरा - पूरा स्पर्श होता है। इनकी संख्या २५ होती है , जिन्हे अलग-अलग वर्गों में बांटा गया है। 

कवर्ग   

चवर्ग 

टवर्ग 

तवर्ग 

पवर्ग 

2 * अन्तःस्थ  व्यंजन -- इनके उच्चारण में जीभ के मुख के किसी भाग से पूरा-पूरा स्पर्श नहीं होता है।

  जैसे - य ,र , ल और व। 

3 * उष्म व्यंजन -- इनका  उच्चारण करते वक्त स्वांस पर जोर देने के कारण उष्मा निकलती है। 

जैसे :-- श , ष , स औरउष्म व्यंजन है। 

                                               संयुक्त व्यंजन 

हिंदी भाषा में क्ष (क्+ ष का मेल ), त्र (त् + र का मेल ), ज्ञ (ज् +ञ का मेल ) और श्र (श्+ र का मेल ) संयुक्त व्यंजन  में जाते हैं। इन वर्णो का प्रयोग संस्कृत से हिंदी में आए शब्दों के रूप में ही होता है। 

                                            संयुक्ताक्षर और द्वित्व व्यंजन 

जब दो व्यंजन आपस में जुड़ते हैं तब पहले व्यंजन के उच्चारण में 'अ ' का लोप हो जाता है जैसे क्,ब् हो जाता है।  इस प्रकार के व्यंजन - मेल को  संयुक्ताक्षर कहा जाता है। 

जैसे - क्+ख  = क्ख -- मक्खी 

संयुक्ताक्षरों में या र्  का मेल इस प्रकार होता है --

र्+ष = र्ष      --    वर्षा 

संयुक्ताक्षरों में जब  समान व्यंजन का मेल हो तब वह द्वित्व व्यंजन कहलाता है। 

जैसे - च् + च  =  च्च - बच्चा 

                                         वर्ण - विच्छेद  

वर्णो के मेल से शब्द बनते लेकिन ,जब किसी शब्द के वर्णो को अलग - अलग करके लिखा जाता है तब इसे वर्ण विच्छेद कहा जाता है। 

जैसे -        कमल   =    क्     +         अ         +        म्     +       अ         +            ल्          +            अ

पूर्ण व्यंजन वर्ण यदि मात्रा रहित हो तो उसमे हल् चिन्ह लगाकर उसके बाद 'अ ' लिखा जाता है। 

जैसे -             प = प् + अ 

                                         स्वरों की मात्राएँ 

जब किसी स्वर को व्यंजन के साथ जोड़ा जाता है तब वह मात्रा के रूप  में  लिखा जाता है। 'अ ' को छोड़कर अन्य  स्वरों की अपनी मात्राएँ  होती है। जो इस प्रकार है -

आ        इ       ई        उ         ऊ          ऋ        ए          ऐ       ओ            औ 

   ा         ि        ी          ु            ू             ृ            े          ै       ो                 ौ 

स्वरों की भाँती प्रयुक्त किए जाने वाले अन्य वर्णो की भी मात्राएँ होती है। 

जैसे -   अनुस्वार  (ां )  अनुनासिक (ाँ )       आगत स्वर  (ॉ )   विसर्ग  ( ाः )  

                                           वर्णो के उच्चारण स्थान 

अ - कंठ                                 ऊ - ओष्ठ                            औ - कंठ +ओष्ठ 

आ - कंठ                                 ऋ - मूर्धा                           अं  - नासिका 

इ   -तालु                                  ए - कंठ + तालु                 अ ँ  -  कंठ + नासिका 

ई - तालु                                   ऐ - कंठ + तालु                  अ ॉ -  कंठ + ओष्ठ              

उ - ओष्ठ                                   ओ - कंठ + ओष्ठ                 अ ः  -  कंठ 

व्यंजन वर्णो का उच्चारण करते समय जिह्वा का स्पर्श मुख के इन भागो  से होता है -

कवर्ग -  जीभ का पुरा - पुरा स्पर्श   कंठ से 

चवर्ग -  जीभ का पुरा - पुरा स्पर्श तालु से 

टवर्ग - जीभ का पुरा - पुरा स्पर्श तालु से 

तवर्ग - जीभ का पूरा - पूरा स्पर्श दन्त से 

पवर्ग - जीभ का पूरा - पूरा स्पर्श ओष्ठ से 

य - जीभ का स्पर्श तालु से 

र - जीभ का स्पर्श मूर्धा से 

ल - जीभ का स्पर्श  दांत से 

व - जीभ का स्पर्श दन्त और ओठ  से 

श - जीभ + तालु से (श्वांस  पर जोड़ देकर )

ष - जीभ + मूर्धा से (श्वांस  पर जोड़ देकर )

स - जीभ तथा दांत से (श्वांस  पर जोर देकर)

ह वर्ग - जीभ + कंठ (श्वांस पर जोड़ देकर )

शब्दाबली Terminology  :-

स्वर = Vowel            हृश्व स्वर = Short vowel          दीर्घ स्वर = Long vowel      

अयोगवाह = After-sound            अनुस्वार = Nasal vowel             अनुनासिक = Semi- nasal vowel

प्लुत स्वर = Protracted-sound vowel          व्यंजन = Consonant          स्पर्श व्यंजन = Mute consonant

अन्तःस्थ व्यंजन = Semi vowel                  उष्म व्यंजन = Sibilant consonant        

संयुक्त व्यंजन = Conjunct consonant            संयुक्ताक्षर = Joint letters                 

वर्ण विच्छेद = Disjointing of letters               विसर्ग = Soft aspirate


                    


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